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निर्भया केस: सुप्रीम कोर्ट में 3 बजे होगी सुनवाई, दिल्ली हाई कोर्ट ने दोषियों की याचिका खारिज की

निर्भया केस: सुप्रीम कोर्ट में 3 बजे होगी सुनवाई, दिल्ली हाई कोर्ट ने दोषियों की याचिका खारिज की

नई दिल्ली: निर्भया के दोषियों की फांसी से चंद घंटे पहले उनके वकील एपी सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रायल कोर्ट से जारी डेथ वारंट रोकने की मांग की. लेकिन दो घंटे से भी अधिक समय तक हुई सुनवाई  के बाद कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया. दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संजीव की बेंच में यह सुनवाई हुई. बहस के दौरान दोषियों के वकील ने फांसी रुकवाने के लिए तरह तरह के बहाने बनाए. लेकिन हाई कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया, ‘आपको सिस्टम से खेलने की अनुमति नहीं दे सकते.’

निर्भया केस: सुप्रीम कोर्ट में 3 बजे होगी सुनवाई

दोषियों की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में खारिज हो गई है. अब दोषी देर रात सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि होई कोर्ट से फैसले की कॉपी मिलने के बाद SC जाऊंगा. वहीं निर्भया की मां ने कहा है कि दोषियों की याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी खारिज होगी और दोषियों को फांसी जरूर होगी. सुप्रीम कोर्ट में 3 बजे इस मामले में सुनवाई होगी.

नहीं रुकेगी निर्भया के दोषियों की फांसी, दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषियों की फांसी रोकने के लिए दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया. कोर्ट ने उन दलीलों को ठुकरा दिया जिसमें कहा गया था कि कई कोर्ट में इस मामले में याचिकाएं दायर हैं. हाई कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई आधार नहीं दिया गया. यह बिना किसी इंडेक्स, तारीखों की लिस्ट, पार्टी के मेमो और हलफनामे के दायर की गई.

दोषियों की ओर से एक और वकील शम्स ख्वाजा ने बोलना शुरू कर दिया

दोषियों के एक और वकील शम्स ख्वाजा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. वकील ने कहा कि राष्ट्रपति ने दया याचिका पर सही से विचार नहीं किया. राष्ट्रपति ने यौन उत्पीड़न मामलों में अपनी भावनाएं सार्वजनिक की थीं. उन्होंने कहा था कि अपराधी रहम के लायक नहीं हैं. वे पहले से पक्षपाती थे. उनसे सही निर्णय की उम्मीद कैसे की जा सकती है. इस पर जज ने कहा कि आप ये दलीलें अब क्यों दे रहे हैं. 6 घंटे बाद फांसी होने वाली है.

इस पर वकील ने कहा कि ये तथ्य पहले रखे ही नहीं गए थे. जज ने कहा कि अगर आप अपनी पिछली जेब मे कुछ रखेंगे तो यह आपकी गलती है. आपको पहले ही इसे कोर्ट के सामने रखना चाहिए था. अगर आप दलीलें जारी रखना चाहते हैं तो हम इसे सुबह साढ़े पांच बजे तक सुनते हैं.

वहीं इस पर सरकारी वकील राहुल मेहरा ने कहा कि इस याचिका का कोई आधार नहीं है. इसे खारिज किया जाना चाहिए.

दूसरे वकील की याचिका पर भी कोर्ट की फटकार
वकील शम्स ख्वाजा ने कहा, ‘एक कार्यक्रम में भारत के राष्ट्रपति ने अपनी भावनाओं को सार्वजनिक किया कि यौन उत्पीड़न के मामलों में मौत की पुष्टि के लिए दया नहीं है. पहली दया याचिका से पहले ही वह हमारे खिलाफ पक्षपात कर रहा था. यह समय केस के मेरिट पर बहस का नहीं है, यह केस का ट्रायल स्टेज नहीं है.  इस पर वकील ने कहा यह मुद्दे नहीं उठाए गए हैं. इस पर कोर्ट ने वकील से कहा,’ये आप अपने आप से पूछिए, आपने यह प्वाइंट क्यों नहीं उठाए, आपने इन्हें अपनी पिछली जेब में क्यों छिपा रखा था.’

दोषियों के वकील ने कोरोना का बहाना बना मांगी मोहलत
सरकारी वकील राहुल मेहरा ने कहा, ‘इन्होंने एक आधार कोरोना वायरस को अपनी याचिका में बनाया है.’ जज ने कहा, ‘आपको कोर्ट के प्रति निष्पक्ष होने की जरूरत है. आपको अपने मुवक्किल के प्रति फेयर होना चाहिए. महत्वपूर्ण तथ्यों के साथ आए. 11 बजने को हैं. यह आपके मुवक्किल के पक्ष में नहीं जाने वाला. अपने मुवक्किल के साथ कुछ न्याय करें. कोई प्वाइंट रखें.’ एपी सिंह ने कहा, ‘मैं कोरोना वायरस की वजह से होपलेस हूं. मुझे कोई सुविधा नहीं मिल रही. मुझे 1-2 दिन ओर दें.’ जज ने कहा, ‘आपको सिस्टम से खेलने की अनुमति नहीं दे सकते.’

आईसीजे में मामला लंबित
एपी सिंह ने कहा, ‘अक्षय की पत्नी की याचिका ICJ में लंबित है.’ जस्टिस मनमोहन ने कहा, ‘उसका कोई मतलब नहीं है.’

जेल में हुआ था हमला
एपी सिंह ने कहा, ‘पवन गुप्ता ने कड़कड़डूमा कोर्ट ने मंडोली जेल में पुलिसकर्मियों की पिटाई को लेकर याचिका दायर की है. कोर्ट ने उस पर ATR मांगी है. उसके शरीर पर 14 टांके आए है. ठीक है, वो फांसी की सज़ा पाया शख्स है, पर इस मामले में वो पीड़ित है . ये नाइंसाफी होगी, अगर इस मामले में  बिना इंसाफ किए फांसी पर लटका दिया जाए.उसे आरोपी पुलिस कर्मियों की शिनाख्त करने दें.’

किताब का दिया हवाला
एपी सिंह ने तिहाड़ जेल के अधिकारी सुनील गुप्ता की किताब ब्लैक वारंट का हवाला दिया. इस पर जस्टिस मनमोहन ने कहा, ‘समझने की कोशिश करें. तुम्हारे मुवक्किल का भगवान के पास जाने का समय नजदीक है. हमारा समय बर्बाद न करो. आप यहां किताब का हवाला नहीं दे सकते.’

कोरोना के चलते फोटोकॉपी मशीन की दुकान बंद थी
एपी सिंह ने कहा, ‘याचिका के साथ संबंधित दस्तावेज इसलिए नहीं लगा पाया क्योंकि कोरोना वायरस की दहशत के कारण कोर्ट में फोटोकॉपी मशीन की दुकान बंद थी.’ इस पर जस्टिस मनमोहन ने कहा, ‘इस तरह की बेतुकी दलीलें न दें. आप अपनी कमी की जो दलीलें दे रहे हैं वो स्वीकार्य नहीं हैं. आज आप 3 कोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं. हम 10 बजे आपको सुन रहे हैं.’

एनचआरसी में लंबित है केस
एपी सिंह ने कहा, ‘मीडिया ट्रायल और उनके दबाव में दोषियों को बचाव का उचित मौका नहीं मिला. एक याचिका NHRC में लंबित है, एक राष्ट्रपति के पास, बिहार में एक तलाक याचिका लंबित है. एक याचिका हाई कोर्ट में लंबित है. एक याचिका चुनाव आयोग में लंबित है. ऐसे में फांसी कैसे हो सकती है?’ इस पर जस्टिस मनमोहन ने कहा, ‘हमने अपने पूर्व के आदेश में साफ तौर पर कहा था कि ट्रायल कोर्ट के आदेश को लेकर अगर कोई दुविधा है तो आप सीधे हाई कोर्ट जा सकते हैं.’

सरकारी वकील राहुल मेहरा ने कहा, ‘निर्भया केस में दोषियों पर वारदात से पहले लूटपाट का केस भी दर्ज किया था. ये घटना उसी बस में हुई थी.’

सरकारी वकील ने कहा ये कोर्ट का समय बर्बाद कर रहे हैं
एपी सिंह ने कहा, ‘हम पटियाला हाउस कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दे रहे हैं जिसके तहत मेरे मुवक्किल पवन, विनय ओर अक्षय की फांसी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया.’ सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा, ‘यहां कोई मेमो ऑफ पार्टी नहीं है. यह केवल पवन के बारे में बात कर रहे हैं. हम नहीं जानते कि अन्य याचिकाकर्ता को हैं? इन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने चाहिए था. ये यहां क्यों आए? इन्होंने ढाई साल तक कोई लीगल रेमेडी नहीं ली और अब रात में हाई कोर्ट का समय बर्बाद कर रहे हैं. यह याचिका अधूरी है. इस पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए.’

जज ने एपी सिंह से पूछा, ‘क्या आपने यह याचिका दायर करने की अनुमति ली है? यह किस तरह की याचिका है? न तो लिस्ट ऑफ अपडेट है और न ही कोई मेमो, न संलग्न दस्तावेजों का ब्योरा. क्या आपके पास यह याचिका दायर करने की अनुमति ली है?

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