बिहार

जिला महासचिव रामनाथ कुमार ने हड़ताल में रहते हुए कोरोना द्वय से डटकर सामना करने का किया अपील।

जिला महासचिव रामनाथ कुमार ने हड़ताल में रहते हुए कोरोना द्वय से डटकर सामना करने का किया अपील।

समस्तीपुर जिला में बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के आवाहन पर हड़ताल के 43 वें दिन जिला महासचिव रामनाथ कुमार ने हड़ताल में रहकर कोरोना द्वय से डटकर सामना करने की अपील किया है।

उन्होंने शिक्षकों का हौसला अफजाई करते हुए कहा कि आज हड़ताल के 43 वें नियोजित के इतिहास की पुनरावृत्ति हुई है।2015 में 43 दिन उपरांत प्राकृतिक आपदा भूकंप के आ जाने से एवं आपसी एकता विखंडित होने के बाबजूद भी सरकार से सफल वार्ता होने पर चायनीज वेतनमान के साथ हमलोग हड़ताल से वापस आये थे।ठीक उसी प्रकार 2020 में भी हड़ताल के 33 वें दिन से ही वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के प्रकोप से लॉक डाउन का सामना करना पड़ रहा है।उससे पूर्व सूबे बिहार में नियोजित शिक्षकों ने कोरोनो जागरूकता अभियान गली मुहल्ले में जाकर चलाया।लोगों को इसके लक्षण व बचाव से अवगत कराया।इसी का देन है कि पूरा बिहार जागृत हो कोरोना से लड़ने की हिम्मत कर पाया।सरकार से दो कदम आगे आकर हमलोगों ने जान को जोखिम में डालकर भी समाज में जन चेतना फैलाने का कार्य किया जो अविस्मरणीय है।भले सरकार ने हमलोगों को अनदेखी किया हो ,परंतु समाज ने इसे सराहा ही नही अपितु लिखित समर्थन भी दिया।जिससे हमलोगों में नई ऊर्जा का संचार हुआ और हमलोग अपनी विभिन्न मांगों को ले कृत संकल्पित होते गए।सरकार द्वारा हमारे आंदोलन को कुचलने का एक से बढ़कर एक षड्यंत्र रचा गया। प्राथमिकी Fकी धमकी,निलंबन,बर्खास्तगी करने के साथ प्रलोभन भी दिया गया।लेकिन न तो हमने घुटने टेके और न ही टेकेंगे।
अभी 14 अप्रैल तक पूर्णतः लॉक डाउन है।कोरोना की स्तिथि सामान्य न होने पर लॉक डाउन बढ़ने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है।इधर हमलोगों के द्वारा प्रिंट मीडिया &सोशल मीडिया द्वारा मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति यहाँ तक कि मानवाधिकार आयोग से भी अपील किया गया कि भयानक त्रासदी के मद्देनजर सरकार वार्ता कर हड़ताल तुड़वाने का प्रयास करे।पर अभी तक इस निरंकुश, तानाशाह, हिटलरशाही और घमंडी सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगी है।5000 से ऊपर शिक्षकों पर करवाई हो चुकी है।क्या उनका परिवार नहीं है?हमलोग क्या मुँह दिखाएंगे उनको?सबसे ज्यादा कार्यवाई माध्यमिक शिक्षकों के ऊपर हुई है।वो लोग थोड़ा भी नहीं घबराय हैं और हड़ताल में डटे हुए हैं।फिर प्राथमिक शिक्षकों को क्यों बेचैनी है?सबसे बड़ी बात की अभी आप जाएंगे कहाँ? बिना वार्ता किये आपको मिलेगा क्या?आप क्या सोचकर हड़ताल पर आए थे कि आज गए और कल मांगे पूरी हो जाएगी?ये जानते हुए की नो वर्क नो पे का सिद्धांत लागू होता है। ये हड़ताल नेतृत्वकर्ता का नहीं अपितु आप आम शिक्षकों है।आपकी ताकत व दवाब ही ऐसा था कि सभी 28 संघ एक बैनर के तले आये।तो फिर इतने बड़े आंदोलन को आप कमजोर करना क्यों चाह रहे हैं?अगर आपके पैर डगमगाने लगे है तो एक बार 5000 से ऊपर शिक्षकों के परिवारों का ख्याल कर आत्मचिंतन करेंगे तो मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आपके मन से ये दुबिधा स्वतः दूर हो जाएगी।
आप थोड़ा धैर्य और संयम से काम लें।अपने नेतृत्वकर्ता पर विश्वास रखें।जब भी वार्ता होगी सभी कार्य दिवसों का सामंजन होगा।हाँ एक बात बता दूं कि लॉक डाउन की गिनती नहीं होगी।चुकी ये सरकार द्वारा घोषित है।याद रखेंगे 2015 की 43 दिनों का सामंजन मात्र 11 रविवार को कार्य कर सामंजित किया गया था।हड़ताल अवधि में रविवार और व्रत त्योहार की छुट्टियों की गिनती काटी जाती है।लॉक डाउन के मद्देनजर ही प्रदेश में बैठक नहीं हो पाई है।फिर भी वयोवृद्ध संजोजक श्री ब्रजनंदन शर्मा और मीडिया प्रभारी मनोज कुमार द्वारा ये अपील की गई है कि अगले निर्णय आनेतक हमलोग हड़ताल में बने रहेंगे।अर्थात हड़ताल जारी रहेगा।और राज्यस्तर से कोई भी नया कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है।31 मार्च को उपवास और 2 अप्रैल को वेदना प्रदर्शन किसी खास संगठन द्वारा घोषित कार्यक्रम है।ये समन्वय समिति का निर्णय नहीं है।समन्चय समिति के तरफ से मात्र ये निर्णय लिया गया है कि हड़ताल में रहते हुए घर से सोशल मीडिया के माध्यम से ऑनलाइन कोरोना जागरूकता अभियान चलाना है।
अतः सबों से अपील है कि इस निर्णय का सम्मान करते हुए अगले निर्णय होने तक हड़ताल में बने रहेंगे।

पलटन साहनी संवाददाता समस्तीपुर की रिपोर्ट

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