बिहार

सारण पंचायत स्तरीय विधान परिषद सीट पर आमने सामने की लड़ाई में पलडा राजद का भारी

सारण पंचायत स्तरीय विधान परिषद सीट पर आमने सामने की लड़ाई में पलडा राजद का भारी

सारण पंचायत स्तरीय विधान परिषद सीट पर आमने सामने की लड़ाई में पलडा राजद का भारी

महागठबंधन बनाम एनडीए के बीच सारण पंचायत स्तरीय विधान परिषद सीट पर लड़ाई एनडीए के उम्मीदवार होंगे इंजीनियर सच्चिदानंद राय और राजद की लालटेन थामेंगे सुधांशु रंजन
छपरा। पंचायती राज व्यवस्था के तहत पंचायतों के चुनाव समाप्त होने के बाद विधान परिषद सीट जिसमें पंचायत प्रतिनिधि अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे तैयारी प्रारंभ हो गई है।सारण पंचायत स्तरीय विधान परिषद सीट को लेकर स्थिति अब धीरे-धीरे साफ होने लगी इस सीट पर भाजपा के इंजीनियर सच्चिदानंद राय निवर्तमान विधान पार्षद हैं और राजद के तरफ से सुधांशु रंजन को उम्मीदवार बनाया गया है उनकी उम्मीदवारी पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने खुद मोहर लगाई है। यूं तो क्षेत्र में आधा दर्जन के करीब प्रत्याशी पंचायत प्रतिनिधियों को लुभाने में लगे हैं पर मुख्य मुकाबला इंजीनियर सच्चिदानंद राय और सुधांशु रंजन के बीच होने की प्रबल संभावना है इंजीनियर सच्चिदानंद राय भूमिहार बिरादरी से आते हैं जबकि सुधांशु रंजन बिरादरी। सुधांशु रंजन राजद विधायक जितेंद्र राय के अत्यंत करीबी भी हैं।पंचायत प्रतिनिधियों के द्वारा चुने जाने वाले विधान परिषद सीट को लेकर सारण में शुरू हो चुका है संग्राम। निवर्तमान विधान पार्षद सच्चिदानंद राय व राजद के प्रत्याशी सुधांशु रंजन ने नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के सम्मान समारोह के बहाने शुरू कर दिया है अपना चुनाव प्रचार। कुल 5322 पंचायत प्रतिनिधि करेंगे अपने मताधिकार का प्रयोग. जिसमें 47 जिला परिषद के सदस्य 300 अट्ठारह मुखिया 453 पंचायत समिति सदस्य 4504 वार्ड सदस्य हैं. पिछली बार यहां से भाजपा समर्थित उम्मीदवार सच्चिदानंद राय विजयी हुए थे। सच्चिदानंद राय का भाजपा से टिकट कंफर्म है जबकि राजद के उम्मीदवार सुधांशु रंजन हर हाल में इस बार सच्चिदानंद राय के विजय रथ को रोकने के प्रयास में है।। लेकिन सबसे ज्यादा पसीना सुधांशु रंजन ही बहा रहे हैं अब सच्चिदानंद राय भी चुनाव परिणाम आने के साथ पंचायत प्रतिनिधियों का सम्मान समारोह आयोजित कर रहे हैं।पंचायत प्रतिनिधियों के द्वारा चुने जाने वाले विधान परिषद सीट के लिए वार्ड सदस्य पंचायत समिति मुखिया व जिला परिषद के सदस्य वोट करते हैं। पंचायत प्रतिनिधियों के द्वारा चुने जाने वाले विधान परिषद सीट के लिए पार्टी से ज्यादा मैनेजमेंट काम करता है जिस प्रत्याशी का मैनेजमेंट तगड़ा होता है जीत उसे ही नसीब होती है पिछली बार सच्चिदानंद राय का मैनेजमेंट भारी पड़ा था। इस बार सारण के नव निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों में राजद का पलड़ा भारी बताया जा रहा है। अगर राजद अपने कुनबे को समेटने में सफल रहा तो परिणाम चौंकाने वाले हो सकते है।

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