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ISIS ने ली ईरान में नरसंहार की जिम्मेदारी 

ISIS ने ली ईरान में नरसंहार की जिम्मेदारी

ईरान में 100 से अधिक लोगों के नरसंहार की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने ली है. आतंकी संगठन ने टेलीग्राम पर मैसेज पोस्ट कर कहा कि उसने अपने दो फिदायीन हमलावरों को वहां भेजा था. कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी की चौथी बरसी मनाने के लिए कब्रिस्तान में भारी भीड़ इकट्ठा हुई थी. धमाके इतने तेज थे कि देखते ही देखते मरने वालों की संख्या 100 के पार चली गई. ईरान ने कहा है कि हमले के पीछे चाहे जो भी हो, वह बदला जरूर लेगा.

ईरान के करमान शहर में बुधवार को हुए दो धमाकों में कम से 103 लोगों की मौत हो गई जबकि 188 घायल हुए हैं. ईरान की सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी. मीडिया ने बताया कि 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए जनरल कासिम सुलेमानी की बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में ये धमाके हुए. इस हमले को ईरान में 1979 में हुई इस्लामी क्रांति के बाद सबसे घातक आतंकवादी हमला माना जा रहा है. अबतक इस हमले की किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है.

सुलेमानी की हत्या की चौथी बरसी

करमान शहर राजधानी तेहरान से 820 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में है. अधिकारियों ने कहा कि बाद में भागते समय कुछ लोग घायल हो गए. एजेंसी ने बताया कि ये धमाके रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कुद्स फोर्स के प्रमुख रहे जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या की चौथी बरसी पर करमान में उनकी कब्र के करीब आयोजित एक कार्यक्रम में हुए.

20 मिनट में दो धमाके

ईरान के आंतरिक मामलों के मंत्री अहमद वाहिदी ने सरकारी टेलीविजन को बताया कि पहला धमाका अपराह्न तीन बजे के आसपास हुआ जबकि दूसरा धमाका पहले धमाके के करीब 20 मिनट बाद हुआ. उन्होंने बताया कि दूसरे धमाके में सबसे अधिक लोगों की मौत हुई. ईरान के सरकारी टेलीविजन और समाचार एजेंसी ‘इरना’ ने देश की आपातकालीन सेवाओं के अधिकारियों के हवाले से शुरुआती हताहतों की संख्या की जानकारी दी. बाद में हताहतों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई.

ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

ईरान में हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं जिनमें 2022 में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद वृहद पैमाने पर हुए प्रदर्शन शामिल हैं. देश में 1979 की इस्लामी क्रांति के आसपास की उथल-पुथल के दौरान भी निर्वासित समूहों के हमलों का सामना करना पड़ा था. ईरान स्वयं गाजा पट्टी में हमास के साथ-साथ लेबनानी शिया मिलिशिया हिजबुल्लाह और यमन के हुती विद्रोहियों का समर्थन करता है.

सुलेमानी अपने देश में ही अनजान शख्स थे

सुलेमानी ईरान की क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों के रणनीतिकार थे. ईरानी शासन के समर्थकों के बीच उन्हें एक राष्ट्रीय नायक के रूप में सम्मान दिया जाता है. सुलेमानी ने 2011 में अरब क्रांति के बाद सीरिया के राष्ट्रपति बशर असद के खिलाफ प्रदर्शनों और गृह युद्ध में भी सीरियाई राष्ट्रपति की मदद की. सुलेमानी 2003 में इराक पर अमेरिकी हमले से पहले अपने देश में भी अनजान शख्स थे. उनकी लोकप्रियता तब बढ़ी जब अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने आतंकवादियों को अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने में मदद की. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक सुलेमानी की मदद से किए गए हमलों में उसके कई सैनिक मारे गए जबकि कई अन्य घायल हुए.

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Author: pnews

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