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नेट पास कैंडिडेट्स को नहीं देना होगा पीएचडी का एग्जाम

नेट पास कैंडिडेट्स को नहीं देना होगा पीएचडी का एग्जाम

देश की शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर करने के लिए सरकार ने नई पहल करते हुए नई शिक्षा नीति लागू की है. ताकि देश की शैक्षणिक व्यवस्था मजबूत हो सके.राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत देशभर के विश्वविद्यालयों में पीएचडी के नए नियम यूजीसी ने लागू किए हैं.
नए नियम के अनुसार स्टूडेंट्स को अब पीएचडी प्रवेश परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी. इसके तहत 70 प्रतिशत अंक नेट की मुख्य परीक्षा व 30 प्रतिशत अंक साक्षात्कार के जोड़े जाएंगे. फिर प्रवीणता लिस्ट जारी की जाएगी. यूजीसी सचिव प्रोफेसर मनीष आर. जोशी की ओर से जारी आदेश में बताया कि अब नेट उत्तीर्ण छात्रों के मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के अंक जोड़कर सीधे मेरिट लिस्ट में शामिल किया जा सकेगा.

बता दें,कैटेगरी 2 और 3 में प्राप्त नेट स्कोर एक वर्ष की अवधि के लिए मान्य होंगे.सहायक आचार्य डॉ.अनुज ने बताया कि पीएचडी प्रवेश परीक्षा नेट पास विद्यार्थियों के लिए खत्म करना अच्छा कदम है.

याद रखें ये तीन कटेगरियां
पहली- वे उम्मीदवार जो पीएचडी में एडमिशन, जेआरएफ और असिस्टेंट प्रोफेसर में नियुक्ति तीनों पदों के लिए पात्र होंगे
दूसरी- वे उम्मीदवार जेआरएफ एडमिशन और जो पीएचडी में बिना असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होंगे
तीलरी- सिर्फ पीएचडी में दाखिले के लिए पात्र होंगे

अब नेट में अच्छा स्कोर लाना अनिवार्य हो जाएगा, देशभर में कई ऐसे विवि हैं,जहां पीएचडी प्रवेश परीक्षा समय पर नहीं हो पा रही. कई विवि तो ऐसे हैं, जहां 2-3 सालों में एक बार पीएचडी प्रवेश परीक्ष का आयोजन हो रहा है.

एक ही टेस्ट से मिलेगा प्रवेश
अब यूजीसी के इस निर्णय से छात्र एक ही टेस्ट के माध्यम से जेआरएफ, नेट एवं पीएचड में प्रवेश पा सकेंगे. साथ ही, विवि क प्रवेश परीक्षा कराने के झंझट से मुक्ति मिलेगी. वहीं, दूसरी ओर नए नियम आने से पीएचडी में एडमिशन लेने लिए नेट परीक्षा में अच्छा स्कोर व अनिवार्य हो जाएगा.

 

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Author: pnews

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