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चिराग पासवान ने जीत ली आखिरी जंग

चिराग पासवान ने जीत ली आखिरी जंग

चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास को नया पार्टी कार्यालय मिल गया है. चाचा पशुपति पारस को मिला हुआ कार्यालय उनसे छीन कर चिराग पासवान को दिया गया है. ये कार्यालय मुख्य तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. रामविलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी के नाम पर था. पार्टी के दोनों गुट होने के बाद ये पहले चाचा पशुपति पारस को मिला और अब चिराग पासवान की पार्टी को मिल गया है. कुछ दिन पहले ही भवन निर्माण विभाग ने पशुपति पारस से ये कार्यालय वापस ले लिया गया था.
दरअसल, बिहार सरकार ने लोक जनशक्ति पार्टी के कार्यालय को वापस ले लिया था. तब सरकार की तरफ से जारी आदेश में कहा गया था कि राजनीतिक पार्टियों को पार्टी कार्यालय के लिए सरकारी भवन आवंटित करने के लिए प्रावधान किया गया है. विभागीय संकल्प के कंडिका दो में साफ किया गया है कि पार्टी कार्यालय के लिए आवासीय भवन का आवंटन 2 सालों के लिए किया जाएगा. 2 साल पूरा होने के बाद आवंटन रिन्यू करना होगा. जोकि ऐसा नहीं किया गया है.
जारी आदेश में आगे कहा गया था कि सरकारी आवास का रिन्यू इस शर्त पर होगा कि समय पर पार्टी की तरफ से सभी करो का भुगतान कर दिया गया हो. आवंटन नवनीकृत नहीं किए जाने की स्थिति में आवंटन रद्द माना जाएगा और तत्काल आवास को खाली करने के लिए बिहार सरकारी परिसर किराया वसूली और बेदखली अधिनियम 1956 के तहत कार्रवाई की जाएगी. जो सरकार ने की और दफ्तर खाली करवा लिया. अब वहीं, दफ्तर चिराग पासवान को जारी कर दिया गया है.

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Author: pnews

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