आजादी के 78 साल बाद भी विकास के नाम पर टाईं- टाईं फीश।
गया से रौशन कुमार का रिपोर्ट

एक कहावत आपने सुनी होगी जनता पस्त अधिकारी मस्त। यह कहावत बिहार के गया जिला के अधिकारियों पर सटीक बैठती है नगर निगम के वार्ड नंबर 44 के यादव टोला में नगर निगम की उदासीनता और विकास कार्यों की अनदेखी का गंभीर उदाहरण है। ग्रामीणों को इस बात का बहुत बड़ा दुख है कि जिस उम्मीद से उन्होंने वोट के चोट से प्रत्याशियों को जिताया था उस उम्मीद पर न केवल स्थानीय वार्ड पार्षद की निष्क्रियता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जनता के भरोसे और उम्मीदों पर किस तरह से पानी फिरता है। ग्रामीणों का कहना है कि दुधकुल जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थान पर कचरे का ढेर लगना और इसे अतिक्रमण मुक्त न करना नगर निगम की घोर लापरवाही को दर्शाता है गली नंबर 6 में सफाई कर्मियों का न आना और कचरा प्रबंधन का अभाव स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है कई बार नगर निगम के अधिकारियों से लेकर वार्ड पार्षद तक इसकी शिकायत की गई लेकिन इसकी अभी तक कोई सुध लेने नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का आरोप कि सफाई के नाम पर आए पैसे का दुरुपयोग हो रहा है, भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है।स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज़ को बुलंद किया है वे नगर निगम के खिलाफ सामूहिक शिकायत दर्ज कर आवाज को उठाया हैं।वार्ड पार्षद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से सीधा संवाद कर इस समस्या को प्राथमिकता देने के लिए कहे जाने के बाद भी आज तक कोई सुध नही लिया






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