बिहार में अपराध: एनडीए सरकार के दौर में बढ़ोतरी या नियंत्रण?
आंकड़ों में समझिए कानून-व्यवस्था की पूरी तस्वीर
पटना: बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में कुल अपराध मामलों की संख्या बढ़ी है, लेकिन प्रति लाख आबादी पर अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम बनी हुई है।
कुल अपराध मामलों में बढ़ोतरी
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और राज्य के आंकड़ों के अनुसार,
2022 में बिहार में करीब 3.5 लाख अपराध दर्ज हुए, जो पिछले वर्ष से लगभग 23% अधिक थे।
2023 में कुल अपराध लगभग 3.53 लाख तक पहुंच गए, जो पिछले दशक में सबसे अधिक स्तर माना गया।
2015 के बाद (कुछ अपवाद वर्षों को छोड़कर) अपराधों की संख्या लगभग हर साल बढ़ती रही है।
अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम
हालाँकि कुल मामलों की संख्या अधिक दिखती है,
2022 में बिहार की अपराध दर लगभग 277 प्रति लाख आबादी रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 422 प्रति लाख था।
2023 में भी बिहार की दर राष्ट्रीय औसत से कम बताई गई है।
हत्या और हिंसक अपराध की स्थिति
बिहार में 2023 में करीब 2,862 हत्याएं दर्ज हुईं, जो पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ा कम है।
फिर भी हत्या और हत्या के प्रयास के मामलों में बिहार देश के शीर्ष राज्यों में बना रहा है।
2022 में प्रति लाख आबादी पर हत्या दर 2.3 और हत्या के प्रयास 6.9 रहे, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक थे।
महिलाओं और शहरों से जुड़े आंकड़े
महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर बिहार में राष्ट्रीय औसत से काफी कम बताई गई है।
2023 में पटना में 14,317 आपराधिक मामले दर्ज हुए और अपराध दर 699.4 रही, जिससे शहर मेट्रो शहरों में पाँचवें स्थान पर रहा।
निष्कर्ष
बिहार में एनडीए सरकार के दौरान तस्वीर मिश्रित दिखती है—
कुल अपराध मामलों में वृद्धि चिंता का विषय है।
लेकिन प्रति लाख आबादी पर अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम रहने से सरकार कानून-व्यवस्था में सुधार का दावा करती है।
वहीं हत्या और हिंसक अपराध अभी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
राजनीतिक रूप से यह मुद्दा आने वाले चुनावों में अहम भूमिका निभा सकता है।
Sourc इंटरनेट से ली गई यह खबर है






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