बेरोजगारी और महंगाई की दोहरी मार से जूझ रहा आम आदमी, राहत के इंतज़ार में जनता
भारत में बढ़ती बेरोजगारी और लगातार महंगाई आम लोगों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनती जा रही है। शहरों से लेकर गांवों तक युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, वहीं रोजमर्रा की जरूरतों—खाद्यान्न, ईंधन और दवाइयों—की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
युवाओं में बढ़ती चिंता
डिग्री और तकनीकी योग्यता होने के बावजूद बड़ी संख्या में युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में सीटें सीमित हैं और निजी क्षेत्र में स्थायी रोजगार के अवसर कम होते जा रहे हैं। इससे परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
महंगाई ने बिगाड़ा घरेलू बजट
रसोई गैस, सब्जियों, अनाज और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि ने मध्यम और निम्न आय वर्ग का बजट पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई परिवारों को खर्च घटाने और बचत खत्म करने की नौबत आ गई है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार सृजन, छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन और महंगाई नियंत्रण के लिए ठोस कदम जरूरी हैं। यदि समय रहते प्रभावी नीतियां लागू नहीं की गईं, तो सामाजिक-आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।
जनता की उम्मीद
आम नागरिकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण होगा, ताकि जीवनयापन आसान हो सके।






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