आशा कार्यकर्ताओं का फूटा ग़ुस्सा, सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन | मानदेय लागू नहीं होने पर दी चुनावी विरोध की चेतावनी
समाचार ब्यूरो, पी न्यूज़ | बिहार
बिहार के विभिन्न जिलों में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरकार द्वारा अब तक मानदेय लागू नहीं किए जाने से नाराज़ इन स्वास्थ्य कर्मियों ने पिछले सप्ताह एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर आक्रोश जाहिर किया।
धरना स्थल पर जुटी सैकड़ों आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि पिछले साल जब उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल किया था, तब सरकार ने आश्वासन दिया था कि उन्हें नियमित मानदेय दिया जाएगा। लेकिन एक साल बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से उन्हें सिर्फ “प्रति कार्य” कमीशन दिया जा रहा है, जबकि वे स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ के रूप में निरंतर सेवाएं दे रही हैं—जैसे कि टीकाकरण, प्रसव, मातृ एवं शिशु देखभाल, जनगणना इत्यादि।
“हमसे तो पूरा काम लिया जाता है, लेकिन बदले में कोई निश्चित मानदेय नहीं मिलता। अब अगर सरकार हमारी बात नहीं सुनेगी तो आगामी विधानसभा चुनाव में हम इसका ज़ोरदार विरोध करेंगे,” — एक प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ता ने कहा।
चुनावी वर्ष में सरकार की बढ़ी चुनौती
यह विरोध ऐसे समय में हो रहा है जब बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। आशा कार्यकर्ताओं ने साफ संकेत दिया है कि यदि इस बार भी सरकार ने मानदेय लागू नहीं किया, तो वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर सरकार के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाएंगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर
स्वास्थ्य सेवाओं की पहली कड़ी मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं के असंतोष का सीधा असर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ सकता है। पहले भी उनकी हड़ताल के दौरान कई टीकाकरण और प्रसव सेवाएं बाधित हुई थीं।






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