Bihar Education News: नालंदा विश्वविद्यालय और हिब्रू यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू, संयुक्त शोध व अकादमिक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
राजगीर (नालंदा)। बिहार के नालंदा जिले स्थित नालंदा विश्वविद्यालय और इजरायल की हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता दोनों संस्थानों के बीच संयुक्त शोध, अकादमिक आदान-प्रदान और सभ्यतागत संवाद को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह साझेदारी उस समय और अधिक चर्चा में आई जब नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे के दौरान भारत-इजरायल संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया।
नेसेट में पीएम मोदी के संबोधन के बाद आभार
गुरुवार को इजरायली संसद (नेसेट) में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के बाद हिब्रू यूनिवर्सिटी ने इस एमओयू का उल्लेख करते हुए आभार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय ने इसे दोनों राष्ट्रों की गहरी साझेदारी का शैक्षणिक क्षेत्र में विस्तार बताया। यह समझौता पिछले कुछ समय से जारी अकादमिक संवाद का औपचारिक परिणाम है।
एमओयू के प्रमुख प्रावधान
इस समझौते के तहत:
फैकल्टी और छात्रों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा।
विभिन्न विषयों में संयुक्त अध्यापन कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
गहन शोध पहलों पर सहयोग किया जाएगा।
बौद्ध अध्ययन, पुरातत्व, गणित और अंतरराष्ट्रीय संबंध जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहेगा।
यह पहल दोनों देशों की प्राचीन सभ्यताओं के बीच एक नए शैक्षणिक सेतु का निर्माण करेगी।
पूर्व तैयारियों ने दी मजबूत नींव
हाल ही में हिब्रू यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपाध्यक्ष प्रो. गाय हारपाज ने कुलपति सचिन चतुर्वेदी सहित अन्य शिक्षकों के साथ विस्तृत चर्चा की थी।
इसी क्रम में बौद्ध अध्ययन निदेशक प्रो. एवीअतार शुलमैन ने नालंदा विश्वविद्यालय का दौरा कर विशेष व्याख्यान भी दिया। इन पहलों ने एमओयू को मजबूत आधार प्रदान किया।
कुलपति का बयान
कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने कहा:
“हिब्रू विश्वविद्यालय के साथ हुआ यह समझौता दोनों देशों के प्राचीन संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगा। इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर बेहतर शोध अवसर मिलेंगे, जो उनके शोध कौशल, नवाचार क्षमता और करियर संभावनाओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।”
अंतर-सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा
नालंदा विश्वविद्यालय लंबे समय से अंतर-सांस्कृतिक समझ और वैश्विक शैक्षणिक सेतु निर्माण के लिए प्रतिबद्ध रहा है। यह एमओयू न केवल अकादमिक सहयोग को विस्तार देगा, बल्कि भारत और इजरायल के बीच सांस्कृतिक एवं बौद्धिक आदान-प्रदान को भी नई दिशा प्रदान करेगा।
द्विपक्षीय संबंधों में नया अध्याय
प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे के दौरान हुए कई समझौतों में यह भी एक महत्वपूर्ण कदम है। शिक्षा, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग से भारत-इजरायल संबंध और मजबूत होंगे, जो वैश्विक स्तर पर शांति, नवाचार और विकास में योगदान देंगे।






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