रूस-पाकिस्तान की नई ‘दोस्ती’ से बढ़ी हलचल: जमीनी रास्ते से जुड़ेंगे दोनों देश, क्या भारत के लिए पैदा होगी चुनौती?
इस्लामाबाद: दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दशकों तक एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे रूस और पाकिस्तान अब व्यापार और कनेक्टिविटी के जरिए अपने रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए सहमत हुए हैं। तुर्की के इस्तांबुल में हुई OIC ट्रांसपोर्ट मंत्रियों की कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों देशों के बीच सीधी रोड और हवाई कनेक्टिविटी बनाने पर ऐतिहासिक सहमति बनी है।
सीधी फ्लाइट और लैंड कॉरिडोर पर फोकस
पाकिस्तान के संघीय मंत्री अब्दुल अलीम खान और रूसी मंत्री दिमित्री स्टानिस्लावोविच की मुलाकात में कई अहम फैसले लिए गए:
- हवाई सेवा: दोनों देश बिना किसी देरी के मॉस्को और इस्लाबाद के बीच सीधी फ्लाइट्स शुरू करने पर सहमत हुए हैं।
- लैंड कॉरिडोर: पाकिस्तान अब चीन और मध्य एशियाई देशों के रास्ते रूस तक सीधे जमीनी मार्ग (सड़क नेटवर्क) से जुड़ने की योजना बना रहा है।
- व्यापार में आसानी: ट्रकों के जरिए माल ढुलाई को सुगम बनाने के लिए वीजा समस्याओं को हल करने और बैंकिंग चैनलों की बाधाओं को दूर करने पर भी चर्चा हुई है।
रूस का पाकिस्तान में बढ़ता निवेश
रूस अब केवल कूटनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के बुनियादी ढांचे में भी गहरी रुचि ले रहा है। मॉस्को ने पाकिस्तान स्टील मिल्स के पुनरुद्धार और रेलवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने में निवेश की इच्छा जताई है। पिछले एक साल में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पीएम शहबाज शरीफ के बीच हुई मुलाकातों ने इन संबंधों को और मजबूती दी है।
क्या भारत के लिए यह चिंता का विषय है?
रूस और पाकिस्तान की इस बढ़ती करीबी ने नई दिल्ली में विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण माने जा रहे हैं:
- चीन की भूमिका: माना जा रहा है कि चीन अपने रणनीतिक हितों के लिए रूस और पाकिस्तान को करीब लाने में ‘ब्रिज’ का काम कर रहा है।
- भारत-रूस संतुलन: भारत लंबे समय से रूस का सबसे भरोसेमंद रक्षा और रणनीतिक साझेदार रहा है। रूस का पाकिस्तान की ओर झुकाव भारत के लिए एक कूटनीतिक संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी कर सकता है।
- बदलता समीकरण: पाकिस्तान, जो कभी अमेरिकी खेमे का हिस्सा था, अब रूस और चीन के ब्लॉक की ओर बढ़ रहा है।
निष्कर्ष
पाकिस्तान के लिए रूस के साथ यह ‘जमीनी जुड़ाव’ आर्थिक संकट से उबरने का एक रास्ता हो सकता है। वहीं रूस के लिए यह दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव को विस्तार देने की एक कोशिश है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि मॉस्को अपने सबसे पुराने दोस्त भारत और इस नए साथी पाकिस्तान के बीच हितों का संतुलन कैसे बनाता है।






Total Users : 10062197
Views Today : 216