पानी पीकर जवानी में बूढ़े हो रहे इस गांव के युवा
गया: रामधार सिंह भोक्ता 26 साल के हैं. बिहार पुलिस की परीक्षा पास कर गए, लेकिन शारीरिक क्षमता के कारण सफल नहीं हो पाए. हाइट इतनी कम है कि होमगार्ड भी नहीं बन सकते. रामाधार सिंह कहते हैं कि सिर्फ उनकी ही नहीं बल्कि गांव के सभी युवाओं की हाइट 5 फीट से कम हैं, जिस कारण यहां के युवाओं को पुलिस या फिर फौज में नौकरी नहीं मिलती है.
“बिहार पुलिस की परीक्षा पास तो कर लिए लेकिन शारीरिक क्षमता में फेल हो गए. होम गार्ड में फिजिकल पास नहीं कर सके. मेरी हाइट पुलिस भरती नियम के अनुसार नहीं है. ज्यादातर युवाओं की हालत खराब है, किसी के हाथ टेढ़े हैं तो कोई तिरछा हो कर चलता है. यह हाल दूषित पानी के कारण है” -रामधार सिंह भोक्ता
भोक्तौरी गांव का हाल खराब: ऐसी हालत सिर्फ युवाओं की नहीं बल्कि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्गों की भी है. गयाजी मुख्यालय से 80 से 90 किमी दूर हड़ही नदी किनारे बांके बाजार प्रखंड की तिलैया पंचायत में आने वाला भोक्तौरी गांव के लोग के लिए ‘जल ही जीवन’ नहीं ‘जल ही जहर’ हो गया है. गांव के 100 प्रतिशत लोग फ्लोरोसिस बीमारी से ग्रसित हैं. लोगों की हाइट नहीं बढ़ रही है. हाथ पैर टेढ़े हो रहे हैं.
2005 के बाद समस्या बढ़ी: 100 साल पुराने इस गांव में लगभग 200 घर हैं. सोहराई सिंह भोक्ता और अन्य लोगों ने इस गांव को बसाया था. 1995 से यहां के लोगों को शारीरिक कठिनाई शुरू हुई. पहले कमर और पैरों में दर्द, फिर धीरे-धीरे शारीरिक हालात खराब हो गयी. सोहराई सिंह के पुत्र हरु सिंह तक स्थिति सामान्य थी. कहा जाए तो 2005 तक सब ठीक था, लेकिन इसके बाद युवा बूढ़े होने लगे.
नौकरी-शादी की समस्या: बीमारी के कारण यहां के लोगों को न पसंद की नौकरी मिलती है और न ही शादी होती है. यहां के 12 युवक-युक्तियां मैट्रिक पास हैं. पांच युवक ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की. 15-25 साल के युवा आठवीं पास हैं. गांव किसानी और मजदूरी पर निर्भर है. जो बौने हैं, वो निजी तौर पर किसी दुकान में काम करते हैं. गांव के 16 दिव्यांग युवा दूसरे प्रदेशों में सिक्यूरिटी गार्ड आदि का काम करते हैं.
शादी होकर आने वाली महिलाएं पीड़ित: हैरानी की बात है कि बाहर के लोग यहां आकर रहते हैं तो उनकी भी हालत वैसी ही हो जाती है. 28 वर्षीय सावित्री देवी की शादी पिछले 8 साल पहले रंजय चौधरी से इसी गांव में हुई थी. जब झारखंड से भोक्तौरी गांव आयी थी तब तो पूरी तरह स्वस्थ थी, लेकिन धीरे-धीरे इनकी हालत खराब हो गयी. अब टेढ़ी होकर चलती हैं. पैर के आकार बदल गए. जवानी में बूढ़ी की तरह दिखने लगी
“मैं और मेरे परिवार के लोगों को पता नहीं था कि गांव की ऐसी स्थिति है. अगर होता तो यहां शादी नहीं होती. किस्मत में यही लिखा था. अब तो मेरे पैर भी नहीं उठते हैं. एक बच्चा है, उसकी भी ऐसी स्थिति हो गई है. उसका इलाज करवा रही हूं.” -सावित्री देवी
सीता देवी का पूरा परिवार दिव्यांग: गांव की सीता देवी (62) देखने में 80 साल की लगती हैं. खुद तो दिव्यांग हैं ही इनके दो पुत्र और एक बेटी दिव्यांग हैं. सीता देवी उसी स्थान पर रहती हैं, जो कुछ वर्षों पहले फ्लोराइड मशीन के लिए दो रूम का एक मकान बनाया गया था. इनके पास खुद का घर नहीं है. दिव्यांगता पेंशन मिलने लगा है.
“एक कट्ठा जमीन थी, लेकिन बेटी चीना कुमारी की शादी के लिए बेच दी. शादी बड़ी मुश्किल से हुई है. लगता था कि लड़की को देखने के बाद रिश्ता टूट जाएगा. डुमरिया प्रखंड के जंगली क्षेत्र में स्थित एक गांव में गरीब घर में बेटी की शादी की है.” -सीता देवी
सत्या 8 साल से ग्रसित: सत्या देवी (60) ने सरकारी योजनाओं को लेकर भी सवाल उठायी. कहा कि पीने के लिए स्वच्छ पानी नहीं है. गांव के कुछ बच्चों को दिव्यांग पेंशन की सुविधा मिलती है, लेकिन अधिकतर दिव्यांग लोगों को यह सुविधा प्राप्त नहीं है. पिछले 8 साल से वह इस बीमारी से ग्रस्त हैं.
हर परिवार के लोग दिव्यांग: सर्जन चौधरी के घर में छोटे बड़े मिला कर 4 लोग दिव्यांग हैं. सुखदेव चौधरी के घर में भी उनके साथ पत्नी और बच्चों को मिला कर कुल 5 लोग दिव्यांग हैं. महादेव भोक्ता के घर में 2 लोग दिव्यांग हैं. सोहराई भोक्ता के घर में 3 लोग दिव्यांग हैं. चंद्र सिंह के घर में 2, सुरेंद्र भोक्ता, रामवृक्ष, बीजू सिंह, महेंद्र सिंह के घर में दो-दो लोग दिव्यांग हैं. बाकी सभी घरों में एक-एक व्यक्ति दिव्यांग हैं.
7 साल की उम्र दिव्यांग’: गांव के अशोर कुमार (22), इनके भाई संतोष कुमार, सिकंदर भोक्ता (30), जितेंद्र कुमार, महादेव सिंह, प्रवीण भोक्ता, पिंटू कुमार, सत्य देवी, चीना कुमारी सभी की हालत दिव्यांग की तरह है. अशोक कुमार बताते हैं कि 7 साल की उम्र में दिव्यांग हो गए. उनके दोनों पैर टेढ़े हो गए. पैरों की हड्डियां टेढ़ी होकर बाहर निकल गई हैं. तेजी से दौड़ नहीं सकते हैं. इनके बड़े भाई घर की जिम्मेदारी उठाए हुए हैं.
“चलने फिरने में परेशानी के कारण 8वीं तक पढ़ाई की, क्योंकि स्कूल गांव से दूर है. बड़ा भाई संतोष कुमार ग्रेजुएट है. आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण बड़े भाई बांके बाजार के एक होटल में काम करते हैं, मेरे परिवार में तीन लोग दिव्यांग हैं. पानी ने पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी.” – अशोर कुमार
जैनेटिक बीमारी नहीं: गयाजी के प्रसिद्ध हड्डी विशेषज्ञ डॉ गुफरान कहते हैं कि फ्लोराइड युक्त पानी लोगों की हाइट बढ़ने से रोकता है. कई जगहों पर ऐसी शिकायतें मिलती रही हैं. उन्होंने यह भी बताया कि उनका बीमारी का जैनेटिक संबंध नहीं है, फिर भी ऐसी हालत है. यह सब फ्लोराइड युक्त पानी पीने से हुआ है
डॉ गुफरान ने बताया कि फ्लोरोसिस फ्लोराइड (भूजल में पाये जाने वाला खनिज ) युक्त पानी पीने से होने वाली बीमारी है. ये तीन प्रकार के होते हैं. डेंटल फ्लोरेसिस, दूसरा स्केलेटल फ्लोरेसिस और तीसरा गैर कंकालिय फ्लोरेसिस हैं.
डेंटल फ्लोरेसिस: डेंटल फ्लोरेसिस में दांतों के रंग में परिवर्तन के रूप प्रकट होते हैं. धब्बे और धारियां पड़ती हैं. जबकि स्केलेटल फ्लोरेसिस एक हड्डी रोग है, जो फ्लोराइड के अधिक सेवन पर हड्डियों के सामान्य विकास में बाधा डालता है. ये सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है.
शुरुआती लक्षण: इसके शुरुआती लक्षण में मांशपेशियों में अकड़न, जोड़ों में दर्द, जलन, चुभन और अंगों में झुनझुनी, थकान आदि होते हैं. जबकि गैर कंकालीय फ्लोरेसिस में नींद में खलल, नई हड्डी का निर्माण, हड्डियों का टेढा होना आदि शामिल हैं.
हड्डियों पर प्रतिकूल प्रभाव: यह हड्डियों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, जिससे वह कमजोर हो जाती हैं. इस कारण कई समस्या पैदा होती है. फ्लोराइड से शरीर पर कई तरह का प्रभाव पड़ता है. यही कारण है कि गांव के हर उम्र के लोग के दांत खराब हो चुके हैं. उनके दांत पीले पड़ चुके हैं. हड्डियां कमजोर हो गयी है.
कैसे करें बचाव?: अगर सरकारी स्तर से व्यवस्था नहीं पहुंची है तो लोगों को चाहिए कि खुद ही अपना बचाव करें. गर्म कर ठंडा होने पर पीएं. साफ सफाई रखें, खानपान में बदलाव करें, विटामिन सी विटामिन ई, कैल्शियम वाले भोजन खाएं. नींबू, संतरा, टमाटर, अमरूद, पपीता, हरे पत्तेदार सब्जियां, अंकुरित अनाज, दाल का उपयोग करें.
सतर्क रहना जरूरी: सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों एक ही गांव में एक जाती बीमार और दूसरी जाति के लोग स्वस्थ हैं? इस सवाल पर रीता कुमारी फ्लोराइड निवारण संसाधन केंद्र की इंचार्ज कहती हैं कि आम तौर पर ऐसा नहीं होता है कि एक ही जगह पर भूजल में फ्लोराइड हो और वहां पर लोग प्रभावित नहीं हों. बचने की यही वजह है कि जो सतर्क रहेंगे वो बचे रहेंगे.
जिला जनित रोग नियंत्रण के जिला पदाधिकारी डॉ एमई हक कहते हैं कि भूजल में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है. रीता कुमारी के अनुसार भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार फ्लोराइड 1 मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए. आपातकालीन स्थिति 1.5 मिलीग्राम तक स्वीकार्य है. हालांकि 1.5 मिलीग्राम से अधिक होने पर खतरा है. रिपोर्ट के अनुसार यहां भूजल में 3.0 मिलीग्राम फ्लोराइड की मात्रा है.
फ्लोराइड की मात्रा 3.0 पीपीएम: रीता कुमारी बताती हैं कि अंतिम बार 28 नवंबर 2025 को पानी की जांच की गयी थी. पटना से फ्लोराइड निवारण संसाधन की एक टीम ने जांच की है. पानी में फ्लोराइड की मात्रा 3.0 पीपीएम पाई गई है. जबकि नॉर्मल फ्लोराइड की मात्रा 0.6 होनी चाहिए.
अब तक 16 तरह की जांच: गांव में अब तक 16 तरह के पानी की जांच हो चुकी है. बांके बाजार फ्लोराइड टेस्ट सेंटर के अनुसार जो टेस्ट हुए हैं उन में पानी का कलर, उसका स्वाद, ओडोर, पीएच, गंदगी, नाइट्रेट, आर्सेनिक, फ्लोराइड, आयरन, सल्फेट एस ओ 4, कैल्शियम, मैग्नीशियम, अल्कालिनिटी, टीडीएस, टोटल हार्डनेस आदि के टेस्ट हो चुके हैं. 9 नवम्बर 2023 की रिपोर्ट में पाया गया था कि यहां का पानी रंग बदला हुआ है. गंदा पानी के साथ स्वादहीन पाया गया था.






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