आंगनवाड़ी सहायिका नियुक्ति पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 30 वर्ष से अधिक अविवाहित महिला को मिलेंगे 10 बोनस अंक
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने आंगनवाड़ी सहायिका नियुक्ति मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए 30 वर्ष से अधिक आयु की अविवाहित महिला को 10 बोनस अंक देने का आदेश दिया है। न्यायालय ने भिंड कलेक्टर द्वारा पारित अपील निरस्तीकरण आदेश को अस्थिर बताते हुए निरस्त कर दिया।
न्यायमूर्ति आशीष श्रोती की एकलपीठ ने यह आदेश वार्ड क्रमांक 13 स्थित आंगनवाड़ी केंद्र 13/2, हाउसिंग कॉलोनी भिंड में सहायिका पद की नियुक्ति से जुड़े मामले में दिया। इस पद के लिए 11 अगस्त 2020 को विज्ञापन जारी हुआ था, जिसमें प्रारंभिक मेरिट सूची में याचिकाकर्ता छठे स्थान पर थी। बाद में शीर्ष पर रही उम्मीदवार को अपात्र घोषित कर दिया गया, लेकिन याचिकाकर्ता को 30 वर्ष से अधिक आयु की अविवाहित महिला होने के बावजूद 10 अतिरिक्त अंक नहीं दिए गए थे।
कलेक्टर ने 1 जनवरी 2020 को कट-ऑफ तिथि मानते हुए बोनस अंक देने से इंकार किया था। हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 1 जनवरी की तिथि केवल न्यूनतम और अधिकतम आयु निर्धारण के लिए लागू है, जबकि बोनस अंक के लिए अलग कट-ऑफ तिथि निर्धारित नहीं है। ऐसे में आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि को ही आधार माना जाएगा।
चूंकि आवेदन की तिथि पर याचिकाकर्ता 30 वर्ष की आयु पार कर चुकी थी, इसलिए अदालत ने उसे 10 बोनस अंक का पात्र माना। न्यायालय ने यह भी कहा कि चयन के बाद परिस्थितियों में बदलाव—जैसे विवाह या निवास परिवर्तन—नियुक्ति को प्रभावित नहीं करता।
अदालत ने नियुक्त प्रत्याशी की नियुक्ति निरस्त करते हुए संबंधित प्राधिकरण को 90 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता को नियुक्ति देने का निर्देश दिया है।






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