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March 3, 2026 11:24 am

बिहार चुनाव परिणाम उम्मीद और समझ से परे – माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य की बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस

बिहार चुनाव परिणाम उम्मीद और समझ से परे – माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य की बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस

पटना, 16 नवंबर 2025

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के अप्रत्याशित परिणामों को लेकर आज पटना में माले महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि यह चुनाव परिणाम न तो अपेक्षित हैं और न ही सहज समझ में आने वाले। उन्होंने इसे “समझ से परे” और “गंभीर शोध का विषय” बताया।

चुनाव के बाद माले की बड़ी पहल

दीपंकर भट्टाचार्य ने बताया कि
18 से 24 नवंबर तक माले के जीते और हारे सभी उम्मीदवार जनता के बीच रहकर सघन जनसंपर्क और जनसंवाद अभियान चलाएंगे।
उन्होंने कहा कि—

जिन्होंने भरोसा किया उनका आभार जताया जाएगा,

और जिन्होंने वोट नहीं दिया उनकी बात भी सुनी जाएगी।

संवाददाता सम्मेलन में राज्य सचिव कुणाल, मीना तिवारी, शशि यादव, विधायक संदीप सौरभ, अरुण सिंह, शिवप्रकाश रंजन और दिव्या गौतम मौजूद रहे।

साथ ही पार्टी की केंद्रीय कमिटी की बैठक 28–30 नवंबर और राज्य कमिटी की बैठक 1 दिसंबर को आयोजित की जाएगी।

चुनाव परिणाम पर तीन बड़े सवाल उठाए

1. मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ का आरोप

दीपंकर ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत चुनाव से ठीक पहले पूरी मतदाता सूची नए सिरे से तैयार की गई।

70 लाख नाम हटाए गए

22 लाख जोड़े गए

और अंतिम सूची के बाद सिर्फ 10 दिनों में 3.5 लाख नए नाम जोड़ दिए गए

कई लोगों ने मतदान के दिन पाया कि उनका नाम सूची से गायब है। उन्होंने इसे चुनाव को प्रभावित करने वाला गंभीर मुद्दा बताया

2. चुनाव से पहले सरकारी योजनाओं और पैसों की बाढ़

उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव घोषणा को इसलिए टाला ताकि वह योजनाओं की घोषणा और फंड वितरण पूरा कर सके।
10,000 रुपये वाली योजना का पैसा पूरे चुनाव काल में खुलकर बंटा, और
30 दिनों में 30 हजार करोड़ रुपये बांटने की छूट दी गई।

उन्होंने कहा कि भारत के चुनाव इतिहास में इस तरह की मिसाल नहीं मिलती, और इससे चुनाव की निष्पक्षता पर गहरा सवाल खड़ा होता है।

3. वोट प्रतिशत और सीटों की असमानता

दीपंकर ने बताया कि माले को 14 लाख से अधिक वोट मिले — यानी वोटों में कमी नहीं है।
फिर भी—

माले का वोट प्रतिशत 3%,

लेकिन सीटें केवल 1% के आसपास।
राजद को भी सर्वाधिक वोट मिले, पर सीटें सिर्फ 25 रहीं।

उन्होंने इसे चुनाव प्रणाली की विडंबना बताया जिसमें अधिक वोट मिलने के बावजूद हार का सामना करना पड़ता है।

14 लाख वोटरों का आभार

दबावों के बावजूद माले को वोट देने वाले 14 लाख लोगों को दीपंकर ने धन्यवाद दिया और कहा कि असल मुद्दों —
रोजगार, शिक्षा, आवास, मजदूरों के अधिकार, दलित उत्पीड़न, महिलाओं पर हिंसा और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा— पर संघर्ष और तेज होगा।

एसआईआर को राष्ट्रीय मुद्दा बताई

उन्होंने कहा कि
इंडिया गठबंधन को झटका जरूर लगा है, लेकिन एसआईआर की चिंता पूरे देश में है।
कई राज्यों से फोन आ रहे हैं कि यह अब देशव्यापी आंदोलन का विषय बनेगा।

“विपक्ष विहीन लोकतंत्र की कोशिशें खतरनाक”

दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि विपक्ष विहीन लोकतंत्र बनाने की कोशिशें गंभीर चिंता पैदा करती हैं, लेकिन इसी चिंता के बीच आगे की राजनीतिक राह भी निकलेगी।

K k sanjay
Author: K k sanjay

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