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March 3, 2026 10:23 am

दरभंगा कोर्ट ने DMCH अधीक्षक और सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष के खिलाफ जारी किया गिरफ्तारी वारंट

दरभंगा कोर्ट ने DMCH अधीक्षक और सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष के खिलाफ जारी किया गिरफ्तारी वारंट

बिहार के दरभंगा व्यवहार न्यायालय के प्रभारी सत्र न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर एक बार फिर अपनी सख्त कार्यशैली और कड़े फैसलों के कारण सुर्खियों में हैं. उनकी बेंच ने हाल ही में दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) की अधीक्षक और सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है.

क्यों की गई कार्रवाई: यह कार्रवाई अदालती आदेश की अवहेलना के गंभीर मामले में की गई है. न्यायाधीश दिवाकर ने स्पष्ट किया कि अदालत के निर्देशों का पालन न करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी.

जमानत याचिका सुनवाई में लापरवाही: मामला सिंहवाड़ा थाना के कांड संख्या 133/25 से संबंधित है, जिसमें मंडल कारा में बंद अभियुक्तों की जमानत याचिका पर सुनवाई चल रही थी. अदालत ने पीड़ित की चोट की रिपोर्ट (इंजरी रिपोर्ट) डीएमसीएच अधीक्षक से मांगी थी. हालांकि, बार-बार निर्देश देने के बावजूद न तो रिपोर्ट कोर्ट को भेजी गई और न ही देरी के कारणों की कोई जानकारी दी गई. इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर ने अधीक्षक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया.

सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष पर भी गिरी गाज: इसी मामले में सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष की लापरवाही भी सामने आई. अदालत ने केस डायरी प्रस्तुत करने का बार-बार निर्देश दिया था, लेकिन इसे भी अनदेखा किया गया. नाराजगी जाहिर करते हुए न्यायाधीश ने थानाध्यक्ष के खिलाफ भी गिरफ्तारी वारंट जारी किया और जांच अधिकारी (आईओ) पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया. अदालत ने बेंता थानाध्यक्ष को डीएमसीएच अधीक्षक के खिलाफ जारी वारंट को लागू करने और 28 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी निर्देश: न्यायाधीश ने सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष के खिलाफ जारी वारंट को लागू करने की जिम्मेदारी दरभंगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को सौंपी है. एसएसपी को 1 सितंबर तक केस डायरी कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है. अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार्य नहीं है, और नियमों का उल्लंघन करने वालों को कठोर दंड भुगतना होगा.

न्यायाधीश दिवाकर की सख्त छवि: सुमन कुमार दिवाकर अपनी बेबाक और सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं. उनके फैसले न केवल कानून के दायरे में रहते हैं, बल्कि समाज में एक मजबूत संदेश भी देते हैं. दरभंगा के लोग उनकी प्रशंसा करते हैं, क्योंकि वे बिना किसी दबाव के निष्पक्ष और त्वरित न्याय सुनिश्चित करते हैं. उनकी सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे पहले भी कई चर्चित मामलों में कड़े फैसले सुना चुके हैं.
न्यायाधीश दिवाकर ने हाल ही में भाजपा के अलीनगर से विधायक मिश्रीलाल यादव को एक मामले में गिरफ्तार कर दो वर्ष की सजा सुनाई थी. इसके अलावा, एक चर्चित आपराधिक वकील को भी अदालत में अनुपस्थित रहने के कारण जेल भेजा गया था. इन फैसलों ने न केवल उनकी कठोरता को दर्शाया, बल्कि यह भी साबित किया कि कानून के सामने कोई भी विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है.

न्यायिक अनुशासन पर जोर: दरभंगा व्यवहार न्यायालय में सत्र न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर का यह रुख स्पष्ट करता है कि वे न्यायिक प्रक्रिया में अनुशासन और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं. इस मामले में उनकी कार्रवाई से न केवल संबंधित अधिकारियों पर दबाव बढ़ा है, बल्कि यह भी स्पष्ट हुआ है कि दरभंगा व्यवहार न्यायालय में कानून का शासन सर्वोपरि है.

K k sanjay
Author: K k sanjay

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