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March 13, 2026 8:13 pm

उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी सेविका को 8हजार सहायिका को4हजार रु0मानदेय मिलता है

उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी सेविका को 8हजार सहायिका को4हजार रु0मानदेय मिलता है

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (सेविका) और सहायिकाएं (सहायिका) भारत में एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक बचपन की शिक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं । ये सामुदायिक कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने वाली रीढ़ हैं, जो विशेष रूप से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करती हैं।
यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी सेविका और सहायिकाओं को दिए जाने वाले मासिक मानदेय की वर्तमान स्थिति, इसमें हुई हालिया वृद्धियों, केंद्र और राज्य सरकार के योगदान और उन्हें प्राप्त होने वाले अन्य लाभों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य इन महत्वपूर्ण सामुदायिक कार्यकर्ताओं की वित्तीय स्थिति पर स्पष्ट और अद्यतन जानकारी प्रदान करना है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सरकार द्वारा “मानद कार्यकर्ता” के रूप में वर्गीकृत किया जाता है । यह वर्गीकरण उनके पारिश्रमिक संरचना को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि प्रदान करता है। उनके व्यापक और महत्वपूर्ण कर्तव्यों के बावजूद, यह “मानद” स्थिति स्वाभाविक रूप से औपचारिक सरकारी कर्मचारियों की तुलना में कम मुआवजे का अर्थ है। यह “मानदेय” बनाम “वेतन” की बहस में एक महत्वपूर्ण बिंदु है और उनके नियमितीकरण की मांगों का एक आवर्ती विषय है। यह विरोधाभास, उनके “मानद” पदनाम और उनकी “आवश्यक, पूर्णकालिक कार्यकर्ता” की वास्तविकता के बीच, उच्च पारिश्रमिक और औपचारिक कर्मचारी स्थिति के लिए चल रही मांगों का एक संरचनात्मक आधार बनाता है। इसका तात्पर्य यह है कि मानदेय में कोई भी वृद्धि, हालांकि स्वागत योग्य है, फिर भी उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप “जीवन यापन योग्य वेतन” या “वेतन” से कम हो सकती है, जिससे लगातार असंतोष और पुनर्वर्गीकरण की वकालत होती है।
II. वर्तमान मानदेय संरचना
उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ती (सेविका) और सहायिकाओं को वर्तमान में निम्नलिखित मासिक मानदेय प्राप्त होता है:
* आंगनवाड़ी कार्यकर्ती (सेविका): ₹8,000 प्रति माह ।
* मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ती: ₹6,000 प्रति माह ।
* आंगनवाड़ी सहायिका: ₹4,000 प्रति माह ।
यह मानदेय विभिन्न भत्तों और लाभों के साथ आता है, जिसमें महंगाई भत्ता और परिवहन भत्ता शामिल हो सकते हैं । आंगनवाड़ी पर्यवेक्षकों (Lady Supervisors) का मासिक वेतन ₹20,000 तक होता है , जो उनके उच्च पद और जिम्मेदारियों को दर्शाता है।
इन विशिष्ट मानदेय आंकड़ों की लगातार रिपोर्टिंग इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जनवरी 2022 में घोषित मानदेय वृद्धि वास्तव में लागू हो चुकी है और वर्तमान में प्रभावी है।

 

यह उन उपयोगकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण है जो अद्यतन जानकारी चाहते हैं, क्योंकि पिछली घोषणाओं में कभी-कभी देरी या गैर-कार्यान्वयन का सामना करना पड़ा है ।
उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी कर्मियों का वर्तमान मासिक मानदेय

| आंगनवाड़ी कार्यकर्ती (सेविका) | ₹8,000 |
| मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ती | ₹6,000 |
| आंगनवाड़ी सहायिका | ₹4,000 |
| आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक | ₹20,000 |
III. मानदेय में हालिया वृद्धि और प्रभावी तिथियां
जनवरी 2022 की घोषणा और कार्यान्वयन
उत्तर प्रदेश सरकार ने जनवरी 2022 में आंगनवाड़ी कार्यकर्तियों और सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि की घोषणा की थी। इस घोषणा के तहत, मुख्य आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यकर्तियों का मानदेय ₹5,500 से बढ़ाकर ₹8,000, मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्तियों का ₹4,250 से बढ़ाकर ₹6,500, और सहायिकाओं का ₹2,750 से बढ़ाकर ₹4,000 प्रति माह किया गया था । यह वृद्धि 1 अप्रैल, 2020 से 31 मार्च, 2022 तक की अवधि के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि के रूप में ₹500 प्रति माह (कार्यकर्ता/मिनी कार्यकर्ता) और ₹250 प्रति माह (सहायिका) के साथ लागू की गई थी ।
यहाँ एक छोटा सा अंतर देखा जा सकता है: मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए घोषित आंकड़ा ₹6,500 था , जबकि वर्तमान में रिपोर्ट किया गया आंकड़ा ₹6,000 है । यह इंगित करता है कि अंतिम कार्यान्वयन में थोड़ा समायोजन हुआ होगा, या हो सकता है कि उच्च आंकड़ा (₹6,500) में एक अस्थायी प्रोत्साहन शामिल रहा हो जो अब मूल मानदेय का हिस्सा नहीं है। यह नीति कार्यान्वयन की गतिशील प्रकृति को दर्शाता है और प्रारंभिक घोषणाओं को वर्तमान रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के साथ क्रॉस-रेफरेंस करने के महत्व को रेखांकित करता है।
आगामी मानदेय वृद्धि (2025-26 के लिए प्रस्तावित)
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025-26 के बजट में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में 10% की वृद्धि प्रस्तावित की है । यह प्रस्तावित वृद्धि 1 अप्रैल, 2025 से लागू होने की संभावना है । इस वृद्धि के लिए अतिरिक्त मानदेय के भुगतान हेतु ₹971 करोड़ की राशि का बजटीय प्रावधान किया गया है । अतिरिक्त मानदेय के लिए ₹971 करोड़ के महत्वपूर्ण बजटीय आवंटन का स्पष्ट उल्लेख, 10% प्रस्तावित वृद्धि और एक ठोस प्रभावी तिथि (1 अप्रैल, 2025) के साथ मिलकर, इस आगामी वृद्धि के लिए एक मजबूत सरकारी इरादे और वित्तीय समर्थन को दर्शाता है। यह चर्चा को पिछली वृद्धियों से पुष्टि की गई भविष्य की योजनाओं की ओर ले जाता है, जिससे लक्षित दर्शकों को मूल्यवान आगे की जानकारी मिलती है।
IV. मानदेय का घटक: केंद्र और राज्य का योगदान
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को दिया जाने वाला मानदेय केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त योगदान से बनता है। आंगनवाड़ी सेवाएं एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका अर्थ है कि केंद्र सरकार एक निश्चित हिस्सा प्रदान करती है, और राज्य सरकारें अपने स्वयं के संसाधनों से अतिरिक्त योगदान देती हैं।
केंद्र सरकार का हिस्सा
1 अक्टूबर, 2018 से, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मासिक मानदेय इस प्रकार है :
* मुख्य आंगनवाड़ी केंद्रों पर कार्यकर्ती (AWW): ₹4,500 प्रति माह।
* मिनी आंगनवाड़ी केंद्रों पर कार्यकर्ती (Mini AWW): ₹3,500 प्रति माह। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सरकार ने मिनी आंगनवाड़ी केंद्रों को नियमित आंगनवाड़ी केंद्रों में अपग्रेड करने के आदेश जारी किए हैं, जिससे उनकी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय भी ₹4,500 प्रति माह हो गया है ।
* सहायिका (AWH): ₹2,250 प्रति माह।
इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन राशि भी देती है: कार्यकर्तियों के लिए ₹500 प्रति माह और सहायिकाओं के लिए ₹250 प्रति माह ।
राज्य सरकार का योगदान
केंद्र सरकार के मानदेय के अतिरिक्त, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपने संसाधनों से इन कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त मौद्रिक प्रोत्साहन/मानदेय का भुगतान करते हैं । केंद्रीय रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर प्रदेश द्वारा दिया जाने वाला अतिरिक्त मानदेय ₹1,500 प्रति माह कार्यकर्तियों के लिए और ₹750 प्रति माह सहायिकाओं के लिए था ।
हालांकि, केंद्रीय स्रोतों द्वारा रिपोर्ट किए गए “अतिरिक्त राज्य मानदेय” (उदाहरण के लिए, AWW के लिए ₹4,500 + ₹1,500 = ₹6,000) और उत्तर प्रदेश के लिए रिपोर्ट किए गए वास्तविक कुल मानदेय (AWW के लिए ₹8,000) के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर मौजूद है। यह इंगित करता है कि राज्य का कुल योगदान केंद्रीय सरकारी दस्तावेजों में उद्धृत “अतिरिक्त मानदेय” आंकड़े से काफी अधिक है। यह अंतर (उदाहरण के लिए, AWW के लिए ₹2,000: ₹8,000 कुल – ₹4,500 केंद्रीय – ₹500 केंद्रीय प्रदर्शन प्रोत्साहन = ₹3,000 राज्य योगदान) राज्य के अपने फंड से कवर किया जाता है, जो उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक अधिक मजबूत वित्तीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसे केवल केंद्रीय सरकार के “अतिरिक्त मानदेय” डेटा से अनुमानित नहीं किया जा सकता है। यह केंद्रीय और राज्य संस्थाओं के बीच विभिन्न रिपोर्टिंग पद्धतियों और श्रेणियों के कारण कुल पारिश्रमिक को ट्रैक करने की जटिलता को उजागर करता है।
मानदेय में केंद्र और राज्य का योगदान
| पद (Designation) | केंद्र सरकार का मानदेय (Central Govt. Honorarium) | प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन (Performance Incentive – Central) | राज्य सरकार का कुल योगदान (Total State Govt. Contribution) | कुल मासिक मानदेय
| आंगनवाड़ी कार्यकर्ती (सेविका) | ₹4,500 | ₹500 | ₹3,000 | ₹8,000 |
| मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ती | ₹4,500 (अपग्रेडेशन के बाद) | ₹500 | ₹1,000 | ₹6,000 |
| आंगनवाड़ी सहायिका | ₹2,250 | ₹250 | ₹1,500 | ₹4,000 |
V. अतिरिक्त लाभ और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं
मानदेय के अतिरिक्त, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं के तहत कई लाभ प्राप्त होते हैं, जो उनके समग्र कल्याण में योगदान करते हैं।
स्वास्थ्य बीमा
अंतरिम बजट वित्तीय वर्ष 2024-25 में, देश भर के सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत ₹5 लाख प्रति परिवार प्रति वर्ष तक का स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करने की घोषणा की गई है । यह कवरेज माध्यमिक और तृतीयक चिकित्सा देखभाल के लिए है। आयुष्मान भारत कवरेज का विस्तार एक महत्वपूर्ण गैर-मौद्रिक लाभ का प्रतिनिधित्व करता है जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों की वित्तीय सुरक्षा और समग्र कल्याण को सीधे बढ़ाता है। यह पहल कम आय वाले कार्यबल के लिए एक महत्वपूर्ण भेद्यता (स्वास्थ्य देखभाल लागत) को संबोधित करती है, जो सीधे मानदेय भुगतान से परे आवश्यक सामाजिक सुरक्षा जाल प्रदान करने के लिए एक व्यापक सरकारी रणनीति को प्रदर्शित करती है। यह एक सकारात्मक विकास है जो उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है।
जीवन और दुर्घटना बीमा योजनाएं
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत ₹2 लाख का जीवन कवर और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) के तहत ₹2 लाख का आकस्मिक मृत्यु या पूर्ण विकलांगता कवर प्रदान किया जाता है । ये बीमा योजनाएं, मासिक मानदेय से अलग होते हुए भी, मृत्यु या विकलांगता जैसी अप्रत्याशित जीवन घटनाओं के खिलाफ महत्वपूर्ण वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं। यह “मानद” कार्यकर्ताओं के लिए बुनियादी सामाजिक सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो उनके योगदान को स्वीकार करने और संकट के समय उनके परिवारों के लिए एक सुरक्षा जाल प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सेवानिवृत्ति लाभ और ग्रेच्युटी
उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्तियों, मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्तियों और सहायिकाओं की सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष निर्धारित है । राज्य सरकार द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की सेवानिवृत्ति पर एकमुश्त ग्रेच्युटी का प्रावधान भी प्रस्तावित है । सेवानिवृत्ति पर एकमुश्त ग्रेच्युटी का प्रस्ताव एक महत्वपूर्ण विकास है, क्योंकि यह एक ऐसे कार्यबल के लिए एक संरचित सेवा-पश्चात वित्तीय लाभ प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ता है जिसमें ऐतिहासिक रूप से उनकी “मानद” स्थिति के कारण ऐसे प्रावधानों की कमी थी। यह, निश्चित सेवानिवृत्ति आयु के साथ मिलकर, उनके रोजगार की शर्तों के धीरे-धीरे औपचारिककरण और उनके वर्षों की सेवा की मान्यता को दर्शाता है, भले ही पूर्ण सरकारी कर्मचारी का दर्जा अभी भी एक दूर की मांग बनी हुई हो। यह उनकी दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए एक सकारात्मक प्रवृत्ति है और उनकी सेवा के वर्षों को स्वीकार करता है।
अन्य भत्ते और सुविधाएं
* मातृत्व अवकाश: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को 180 दिनों का सवेतन मातृत्व अवकाश और 20 सवेतन वार्षिक अवकाश की अनुमति है ।
* वर्दी: सरकार प्रति वर्ष दो सेट वर्दी (साड़ी/सूट) का प्रावधान करती है ।
* पुरस्कार योजना: अच्छे स्वैच्छिक कार्य को मान्यता देने और प्रेरित करने के लिए, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए ₹50,000 और सहायिकाओं के लिए ₹40,000 नकद पुरस्कार की योजना शुरू की गई है ।
* मोबाइल फोन और रिचार्ज: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कुशल सेवा वितरण के लिए स्मार्टफोन प्रदान किए गए हैं । हालांकि, मोबाइल रिचार्ज की अपर्याप्तता एक शिकायत रही है , जिससे उन्हें अपने निजी मोबाइल का उपयोग करना पड़ता है। सरकार द्वारा कई गैर-मौद्रिक लाभ और भत्ते प्रदान किए जाने के बावजूद, अपर्याप्त मोबाइल रिचार्ज का लगातार मुद्दा नीतिगत प्रावधान और जमीनी स्तर की वास्तविकता के बीच एक व्यावहारिक विसंगति को उजागर करता है। यह प्रतीत होता है कि मामूली परिचालन समस्या उनके डिजिटल रूप से सक्षम कर्तव्यों (जैसे पोषण ट्रैकर) को पूरा करने की उनकी क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है और यदि उन्हें इन लागतों को व्यक्तिगत रूप से वहन करना पड़ता है तो उनकी शुद्ध आय को प्रभावी ढंग से कम कर सकती है। यह मानदेय के साथ-साथ परिचालन सहायता के अधिक विस्तृत मूल्यांकन की आवश्यकता को इंगित करता है, क्योंकि इस तरह के अंतराल कार्यक्रम की समग्र प्रभावशीलता और कार्यकर्ता मनोबल को कमजोर कर सकते हैं।
VI. निष्कर्ष और महत्वपूर्ण बिंदु
उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी कर्मियों के लिए वित्तीय स्थिति का सारांश
उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी सेविका, मिनी सेविका और सहायिकाओं को क्रमशः ₹8,000, ₹6,000 और ₹4,000 का मासिक मानदेय प्राप्त होता है। यह मानदेय केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त योगदान से बनता है, जिसमें राज्य का योगदान केंद्रीय रिपोर्टों में बताए गए “अतिरिक्त मानदेय” से अधिक है, जो राज्य की ओर से एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सरकार ने मानदेय में 10% की आगामी वृद्धि (1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी) और ₹971 करोड़ के अतिरिक्त मानदेय के लिए बजटीय प्रावधान किया है, जो भविष्य में उनकी आय में सुधार का संकेत देता है। मानदेय के अतिरिक्त, आंगनवाड़ी कर्मियों को आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य कवरेज, जीवन और दुर्घटना बीमा, सवेतन मातृत्व अवकाश, वर्दी और पुरस्कार जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाएं भी प्राप्त होती हैं।
आगे की संभावनाएं और चल रही चर्चाएं
मानदेय में वृद्धि के बावजूद, आंगनवाड़ी कर्मियों द्वारा अपने काम की प्रकृति के अनुरूप “सरकारी कर्मचारी” का दर्जा और ₹18,000-₹20,000 प्रति माह तक के उच्च मानदेय की मांग जारी है । यह उनके “मानदेय” को “वेतन” में बदलने और उन्हें न्यूनतम मजदूरी कानूनों के दायरे में लाने की व्यापक बहस का हिस्सा है। सेवानिवृत्ति पर एकमुश्त ग्रेच्युटी का प्रस्ताव और मिनी आंगनवाड़ी केंद्रों को नियमित केंद्रों में अपग्रेड करने का निर्णय उनकी सेवा शर्तों को औपचारिक बनाने और उनके योगदान को मान्यता देने की दिशा में सकारात्मक कदम हैं।
उच्च मजदूरी और “सरकारी कर्मचारी” स्थिति की लगातार मांग , हालिया और आगामी मानदेय वृद्धियों के बावजूद, उन्हें “मानद कार्यकर्ता” के रूप में सरकार के वर्गीकरण और उनके पूर्णकालिक, आवश्यक कर्तव्यों की कार्यकर्ताओं की धारणा के बीच एक मौलिक और चल रहे अंतर को उजागर करती है। यह दर्शाता है कि जबकि वृद्धिशील वित्तीय सुधार किए जा रहे हैं, नौकरी की सुरक्षा, औपचारिक रोजगार लाभ (जैसे भविष्य निधि और स्वैच्छिक योगदान से परे व्यापक पेंशन योजनाएं), और एक जीवन यापन योग्य मजदूरी (औपचारिक रोजगार के लिए न्यूनतम मजदूरी मानकों के अनुरूप) के मूल मुद्दे महत्वपूर्ण विवाद के बिंदु बने हुए हैं। यह अंतर्निहित तनाव भविष्य की नीतिगत चर्चाओं और संभावित आंदोलनों को प्रेरित करता रहेगा, क्योंकि जो प्रदान किया जाता है और जो मांगा जाता है, उसके बीच का अंतर सार्वजनिक स्वास्थ्य और कल्याण में उनकी महत्वपूर्ण, फिर भी अक्सर कम आंकी गई, भूमिका की बढ़ती मान्यता को दर्शाता है।

K k sanjay
Author: K k sanjay

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