बिहार में 3 करोड़ का ‘साइबर फ्रॉड’.. सरपंच के बेटे ने बिछाया ठगी का जाल, पाकिस्तान से जुड़े तार
बिहार के मोतिहारी में एक बड़े साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश हुआ है. जहां राजपुर पटखौलिया पंचायत के सरपंच मोहन दास के बेटे विशाल कुमार ने लोगों को हर महीने 500 रुपये का लालच देकर इंडियन पोस्ट पेमेंट बैंक में 250 से अधिक खाता खुलाया. इन खातों का उपयोग 3 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के लेनदेन के लिए किया गया. पुलिस की नोटिस और बैंक की जांच के बाद मामला सामने आया.
कैसे करते थे फ्रॉड: यह साइबर फ्रॉड मोतिहारी के बीजधारी थाना क्षेत्र के लाला छपरा, सुंदरा पुर पश्चिम, केसरिया थाना के ताजपुर देउड़ा और गोछी गांव से जुड़ा है. जांच में पता चला कि विशाल कुमार ने अपने दोस्त अमन कुमार, जो केसरिया थाना क्षेत्र के खाप गोपालपुर का निवासी है, उसके साथ मिलकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया. दोनों ने ग्रामीणों को सरकारी योजना का झांसा देकर उनके बैंक खाते खुलवाए और उनका दुरुपयोग किया.
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब खाताधारकों ने अपनी पासबुक मांगी, लेकिन उन्हें बताया गया कि उनके खाते बंद हो चुके हैं. सरपंच और उसके बेटे से पैसे के बारे में पूछने पर उन्हें टालमटोल जवाब मिला. बैंक द्वारा खातों पर रोक लगाने और पुलिस की नोटिस के बाद सच्चाई सामने आई. कई खातों में 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक माइनस बैलेंस हो गया.
अमन का पाकिस्तानी कनेक्शन: जांच में पता चला कि अमन कुमार पिछले दो साल से इस फ्रॉड में शामिल था और पाकिस्तान के एक युवक इरशाद के संपर्क में काम कर रहा था. अमन ने बताया कि उसकी दोस्ती सोशल मीडिया के जरिए इरशाद नाम के व्यक्ति से हुई थी, जिसने उसे प्रति खाता 2500 से 5000 रुपये देने का लालच दिया. अमन के मोबाइल से पाकिस्तान के कई नंबर और स्कैनर के आदान-प्रदान के सबूत भी मिले हैं.
कैसे खुलवाए गए खाते: अमन ने अपने दोस्त विशाल को इस साइबर फ्रॉड में शामिल किया. विशाल ने निखिल और सद्दाम के साथ मिलकर ग्रामीणों को सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर खाते खुलवाए. प्रत्येक खाते पर 2500 से 5000 रुपये और लेनदेन का 15 से 25 प्रतिशत कमीशन मिलता था. ग्रामीणों को हर माह 500 रुपये देने का वादा किया गया, लेकिन पासबुक नहीं दी गई और बाद में खाते बंद होने की बात कही गई.
इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है, और जांच में पाकिस्तानी साइबर फ्रॉड गिरोह का कनेक्शन सामने आया है. अमन ने पूछताछ में बताया कि वह पहले मध्य प्रदेश में रहता था और हाल ही में मोतिहारी आया था. पिछले दो साल से वह खाते खुलवाने और फ्रॉड के पैसे का लेनदेन करने में शामिल था. पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है.
ग्रामीणों ने बताया कि सरपंच के बेटे विशाल ने उन्हें हर माह 500 रुपये मिलने का झांसा देकर खाता खुलवाया, लेकिन न तो पासबुक दी गई और न ही पैसा मिला. एक मजदूर मुस्लिम कुरैशी का खाता 50 हजार रुपये माइनस में चला गया. पीड़ित ग्रामीण अब इंसाफ की मांग कर रहे हैं और इस धोखाधड़ी से हुए नुकसान की भरपाई चाहते हैं.
“सरपंच के बेटे विशाल ने हमे हर महीने 500 रुपये देने का झांसा देकर खाता खुलवाया, लेकिन पासबुक नहीं दिया. बाद में बताया गया कि खाता बंद हो गया है. मजदूर मुस्लिम कुरैशी का खाता 50 हजार रुपये माइनस में चला गया है.”-ग्रामीण






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