बिहार में डेढ़ करोड़ लोगों के राशन पर संकट
बिहार में सरकारी राशन पाने वाले लाखों लाभुकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। राज्य में करीब 8 करोड़ 30 लाख लोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन लेते हैं, लेकिन अब तक केवल 6 करोड़ 74 लाख लाभुकों का ही ई-केवाईसी पूरा हो पाया है। ऐसे में लगभग 1 करोड़ 56 लाख लोगों के राशन कार्ड पर खतरा मंडरा रहा है और उनका राशन रुकने की आशंका जताई जा रही है।
ई-केवाईसी की अनिवार्यता केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के तहत लागू की गई है। इसी बीच चुनाव से पहले मतदाता सूची से नाम कटने, किसान पंजीकरण अधूरा रहने और पेंशनधारियों के केवाईसी लंबित रहने जैसी समस्याओं ने भी आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब बड़ी संख्या में राशन कार्ड धारकों के सामने ई-केवाईसी नहीं होने के कारण नाम कटने का डर बना हुआ है।
किन जिलों में सबसे खराब स्थिति
राज्य में सबसे अधिक राशन कार्डधारी पूर्वी चंपारण में हैं, जबकि सबसे कम अरवल में। अरवल, कैमूर और बक्सर जैसे जिलों में लगभग 90 प्रतिशत तक ई-केवाईसी पूरा हो चुका है। वहीं सीतामढ़ी, वैशाली और सिवान में स्थिति चिंताजनक है—
सीतामढ़ी में करीब 6 लाख लाभुकों का ई-केवाईसी लंबित
वैशाली में लगभग 6.20 लाख लाभुकों का केवाईसी नहीं
सिवान में करीब 5.83 लाख लाभुकों का ई-केवाईसी बाकी
सरकार का क्या कहना है
इस मुद्दे पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि राज्य सरकार लगातार ई-केवाईसी कराने और नए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया चला रही है। पात्र लाभार्थियों के आवेदनों की जांच भी जारी है और यह एक सतत प्रक्रिया है।
मंत्री ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का स्पष्ट निर्देश है कि राज्य में कोई भी गरीब व्यक्ति भूखा न सोए। सरकार इसी दिशा में लगातार प्रयास कर रही है ताकि सभी जरूरतमंदों को राशन का लाभ मिलता रहे।
हालांकि, ई-केवाईसी की धीमी रफ्तार के कारण डेढ़ करोड़ से अधिक लाभुकों के सामने अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिसे दूर करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।






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