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April 10, 2026 1:20 am

विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन, दरभंगा के द्वारा ‘ज्योतिषस्य व्यावहारिकं ज्ञानम्’ विषय पर एकल व्याख्यान आयोजित*

*विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन, दरभंगा के द्वारा ‘ज्योतिषस्य व्यावहारिकं ज्ञानम्’ विषय पर एकल व्याख्यान आयोजित*

*भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण अंग ज्योतिष मानवीय जीवन को समझने और सही दिशा देने का विज्ञान- डॉ चौरसिया*

*ज्योतिष अति विशाल एवं प्राचीन काल गणना का शास्त्र, जिसका प्रारंभिक ज्ञान हम सबके लिए आवश्यक एवं उपयोगी- डॉ कुणाल*

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन, दरभंगा के संयुक्त तत्त्वावधान में “ज्योतिषस्य व्यावहारिकं ज्ञानम्” विषय पर एकल व्याख्यान का आयोजन विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग में किया गया। पीजी संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ कृष्णकांत झा की अध्यक्षता में आयोजित व्याख्यान में मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो पूनिता झा- उद्घाटन कर्ता, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ कुणाल कुमार झा- मुख्य वक्ता, व्याख्यान संयोजक डॉ आर एन चौरसिया- बीज वक्ता, दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ शिवानंद झा- विशिष्ट वक्ता, संस्कृत प्राध्यापिका डॉ ममता स्नेही- स्वागत कर्ता, उदयनाचार्य पीठ की संयोजिका डॉ मोना शर्मा-धन्यवाद कर्ता एवं शोधार्थी रितु कुमारी ने संचालक के रूप में अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन से, जबकि समापन राष्ट्रगान से हुआ। मंगलाचरण कन्हैया झा, दीप प्रज्वलन मंत्र दीपेश रंजन तथा सरस्वती वंदना कुमकुम कुमारी ने प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत पाग, चादर एवं पुष्पगुच्छ से किया गया। वहीं सभी प्रतिभागियों को फाउंडेशन की ओर से प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर सीएम कॉलेज के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ संजीत कुमार झा, महारानी कल्याणी कॉलेज, लहेरियासराय की संस्कृत विभागाध्यक्षा डॉ ममता कुमारी, शोधार्थी- संपा नंदी, मंजू अकेला, उदय कुमार उदेश, योगेन्द्र पासवान, फाउंडेशन के कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह, छात्र- जिग्नेश कुमार, रूपेश, शंकर, गुड़िया, मोनी, मुस्कान, ज्योति, पुष्पा, पूजा, खुशबू, भारती, रेशमी, प्रतिभा, अमीषा, शिवानी, मनीष, शिवम, दिवाकर, राम सुफल, गौरव, राम नरेश, कन्हैया, विकास, लाल बाबू, सुरेन्द्र, शुभम, सुदीप, अमरजीत, प्रेमचन्द, गौतम, मुकेश, सन्नी, कंगन, अभिषेक, अंजली, निशा, श्वेता, रविकांत सहित 60 से अधिक व्यक्ति उपस्थित थे।
उद्घाटन संबोधन में प्रो पुनीता झा ने कहा कि प्राच्य विद्याओं में भारतीय पारंगत रहे हैं। हमारी सभी विधाएं वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हैं, जिनसे प्रभावित होकर विदेशी लोग भी नतमस्तक हो जाते हैं। छात्र संस्कृत एवं ज्योतिषीय ज्ञान का जीवन में उपयोग कर लाभ उठाएं। मुख्य वक्ता डॉ कुणाल कुमार झा ने कहा कि ज्योतिष काल गणना करने वाला शास्त्र है जो अति विशाल एवं प्राचीन कालीन है। इसका प्रारंभिक ज्ञान सबके लिए आवश्यक एवं उपयोगी है। छह वेदांगों में ज्योतिष को नेत्र कहा जाता है, जिसके प्रमुख तीन अंग हैं। सूर्य सृष्टि की उत्पत्ति का मुख्य कारक है जो संसार की आत्मा भी कहा जाता है। सौरमंडल के केन्द्र में स्थित सूर्य निरंतर गतिमान रहता है, जिसकी 12 राशियां हैं, जिन्हें विभिन्न दिशाओं में बांटा गया है। 27 नक्षत्र हैं, जिनका गहरा प्रभाव सभी जीव-जन्तुओं पर पड़ता है। उन्होंने संस्कारों की चर्चा करते हुए कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित ‘शिशुबोध’ ग्रन्थ के अध्ययन से पंचांग का बोध अत्यंत सरल हो जाता है।
बीज वक्ता एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ आर एन चौरसिया ने कहा कि ज्योतिष भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है जो जीवन को समझने और सही दिशा देने का भी विज्ञान है। इसका हमारे दैनिक जीवन से बहुत ही गहरा संबंध है। कहा कि पारंपरिक दृष्टि से ज्योतिष भाग्य और कर्म के मिश्रण को दिखाता है और बतलाता है कि किस समय कौन-सा प्रयास करने पर फल बेहतर मिल सकता है। ज्योतिष हमें महत्वपूर्ण निर्णयों- यज्ञ, विवाह, गृह-प्रवेश, मुंडन, उपनयन, व्यापार- प्रारंभ आदि के शुभ मुहूर्त चुनने और अनुकूलता से कार्य प्रारंभ कर अपने प्रयासों के फल को अधिक लाभकारी बनाने में मदद करता है। इसका उद्देश्य भाग्य पर आश्रित होना नहीं, बल्कि वर्तमान कर्म को जागरुक एवं सुदृढ़ बनाकर भविष्य को उन्नत करना है। दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ शिवानन्द झा ने कहा कि ज्योतिष हमारे व्यावहारिक जीवन से जुड़ा हुआ शास्त्र है। ‘समय का विज्ञान’ कहलाने वाला ज्योतिष का छात्र अपने जीवन में सदुपयोग कर लाभ उठा सकते हैं।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ कृष्णकांत झा ने कहा कि ज्योतिषशास्त्र हमारी प्राचीन विरासत है, जिसमें काल गणना प्रमुख है। ज्योतिष से भविष्य की संभावनाओं की जानकारी मिलने से मन को स्थिर कर चुनौतियों का सामना अधिक विवेक से किया जा सकता है। कहा कि हमारे सभी पर्व-त्यौहार हिन्दी मास- चैत से फागुन के अनुसार ही होते हैं। अंग्रेजी गणना बहुत बाद में आयी है, जिसकी उपयोगिता भी कम है। डॉ ममता स्नेही, डॉ मोना शर्मा एवं रीतु कुमारी आदि ने भी ज्योतिष के व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ज्योतिष ज्ञान अथाह समुद्र जैसा है।

K k sanjay
Author: K k sanjay

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