ईरान संकट के बीच LPG पर बड़ा नियम लागू, अब 25–45 दिन बाद ही होगी गैस सिलेंडर बुकिंग
ईरान संकट के बीच LPG पर सरकार सख्त, सिलेंडर बुकिंग और डिलीवरी के नियम बदले
देश में एलपीजी गैस को लेकर बढ़ती मांग और घबराहट में हो रही ज्यादा बुकिंग के बीच केंद्र सरकार ने सिलेंडर बुकिंग और डिलीवरी के नियमों में अहम बदलाव किए हैं। गुरुवार को संसद में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने नई व्यवस्था की जानकारी दी।
मंत्री ने बताया कि अब ग्रामीण इलाकों में एलपीजी सिलेंडर की अगली बुकिंग 45 दिन बाद ही हो सकेगी, जबकि शहरी क्षेत्रों में दो बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर रखना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि कुछ जगहों पर लोगों द्वारा घबराहट में ज्यादा बुकिंग और डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर सिलेंडर जमा करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है, जिससे कृत्रिम संकट की स्थिति बन रही है।
सरकार ने डिलीवरी सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) प्रणाली को भी तेजी से लागू करने का फैसला किया है। इस व्यवस्था के तहत गैस सिलेंडर की डिलीवरी तभी दर्ज होगी, जब उपभोक्ता के मोबाइल पर आए वन-टाइम कोड (OTP) से उसकी पुष्टि की जाएगी। अभी यह व्यवस्था लगभग 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं के लिए लागू है, जिसे जल्द बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को भी नियंत्रित किया गया है। अब तेल कंपनियां कमर्शियल एलपीजी की औसत मासिक मांग का केवल 20 प्रतिशत ही आवंटित करेंगी, ताकि जमाखोरी और काला बाजारी पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि अवैध बिक्री को रोकना है।
सरकार के अनुसार रिफाइनरियों को दिए गए निर्देशों के बाद पिछले पांच दिनों में एलपीजी उत्पादन में करीब 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही अतिरिक्त गैस की खरीद भी की जा रही है ताकि देश के 33 करोड़ से अधिक परिवारों को रसोई गैस की कमी का सामना न करना पड़े। अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराई जा रही है।
मंत्री ने बताया कि बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत फिलहाल 913 रुपये है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार इसकी कीमत करीब 987 रुपये होनी चाहिए थी। सरकार ने कीमतों का बोझ कम करने के लिए प्रति सिलेंडर लगभग 74 रुपये खुद वहन किया है।
सरकार ने नई व्यवस्था की निगरानी के लिए तेल कंपनियों के अधिकारियों की तीन सदस्यीय समिति का गठन भी किया है, जो देशभर में गैस वितरण और सप्लाई की स्थिति पर नजर रख रही है।






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