Bihar में LPG गैस की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। Patna से Sheohar तक लोग गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण गोइठा और मिट्टी के चूल्हे का सहारा ले रहे हैं। सिलेंडर की कीमत ₹2000-₹2500 तक पहुंच गई है। जानिए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।
LPG संकट से बदली रसोई: बिहार में ‘गोइठा इकॉनॉमी’ फिर हुई जिंदा
गैस सिलेंडर की किल्लत से लोग मजबूर, पटना से शिवहर तक मिट्टी के चूल्हे पर लौटे परिवार
पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और पेट्रोलियम आपूर्ति में कमी का असर अब Bihar में साफ दिखने लगा है। राजधानी Patna से लेकर Sheohar के गांवों तक LPG गैस की भारी किल्लत हो गई है। हालात ऐसे हैं कि कई घरों में गैस चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं और लोग फिर से मिट्टी के चूल्हे और गोबर के उपलों (गोइठा) का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं।
गोइठा की बढ़ी मांग, दाम दोगुना
LPG संकट ने एक पुराने बाजार को फिर जिंदा कर दिया है। जो गोइठा पहले ₹1 में मिलता था, अब ₹2 प्रति पीस बिक रहा है। मांग इतनी बढ़ गई है कि विक्रेताओं को कीमत बढ़ानी पड़ी है। छोटे होटल, ठेला संचालक और आम परिवार भी बड़ी मात्रा में गोइठा खरीद रहे हैं।
10 दिनों में बदले हालात
पटना के किदवईपुरी इलाके की मीरा देवी बताती हैं कि पहले दिनभर में गिने-चुने ग्राहक आते थे, लेकिन अब सुबह से शाम तक लाइन लगी रहती है। अचानक बढ़ी मांग ने ‘गोइठा इकॉनॉमी’ को जन्म दे दिया है।
मिट्टी के चूल्हे पर लौटी रसोई
राजीव नगर की चांदनी देवी बताती हैं कि गैस खत्म होने के बाद नया सिलेंडर नहीं मिला। ब्लैक मार्केट में ऊंचे दाम सुनकर उन्होंने ₹500 का गोइठा खरीदकर मिट्टी का चूल्हा शुरू कर दिया। अब दिन में सिर्फ एक-दो बार ही खाना बन पा रहा है।
शिवहर में हालात ज्यादा गंभीर
Sheohar जिले में स्थिति और भी खराब है। यहां गैस सिलेंडर ₹2000-₹2500 तक पहुंच गया है और एजेंसी पर भी उपलब्ध नहीं है। महिलाएं रोज गोबर के उपले बनाकर सुखा रही हैं ताकि किसी तरह घर का चूल्हा जल सके।
गोबर भी बना ‘हॉट कमोडिटी’
पटना के रामलखन बताते हैं कि पहले अपने खटाल से काम चल जाता था, लेकिन अब बढ़ती मांग के कारण बाहर से गोबर खरीदना पड़ रहा है। यानी अब गोबर भी एक ‘हॉट कमोडिटी’ बन गया है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर
गोइठा पर खाना बनाना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इससे निकलने वाला धुआं Chronic Obstructive Pulmonary Disease (COPD), अस्थमा और आंखों में जलन जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसमें मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड और PM2.5 जैसे कण लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।






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