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March 4, 2026 5:30 pm

मुख्यमंत्री नीतीश ने उद्योग विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की

मुख्यमंत्री नीतीश ने उद्योग विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश ने उद्योग विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की तथा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य की तेज आर्थिक प्रगति और रोजगार सृजन के लिए वृहद पैमाने पर औद्योगीकरण अत्यंत आवश्यक है। बिहार सरकार ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य करते हुए वर्ष 2005 में 46 औद्योगिक क्षेत्रों की संख्या को वर्ष 2025 में बढ़ाकर 94 कर दिया है। इसी प्रकार औद्योगिक इकाइयों की संख्या वर्ष 2005 की 1,674 से बढ़कर वर्ष 2025 में 3,500 हो गई है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में बिहार से औद्योगिक उत्पादों का निर्यात मात्र 25 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर वर्ष 2025 में 17,000 करोड़ रुपये हो गया है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की संख्या वर्ष 2005 की 72 हजार से बढ़कर वर्ष 2025 में 35 लाख हो गई है। बिहार के जीएसडीपी में उद्योग क्षेत्र का योगदान वर्ष 2005 के 5.4 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025 में 21 प्रतिशत से भी अधिक हो गया है, जो राज्य में औद्योगिक विकास के लिए किए गए सरकारी प्रयासों को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अब बिहार को भारत के शीर्ष पाँच निवेश अनुकूल राज्यों में शामिल करने हेतु उद्योग विभाग देश और विदेश के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्रों में निवेशक सम्मेलनों का आयोजन करेगा, ताकि बड़े औद्योगिक निवेश को आकर्षित किया जा सके। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आने वाले पाँच वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश की कार्ययोजना पर कार्य प्रारंभ किया गया है।

इसके तहत Ease of Doing Business को बढ़ावा देना, आधुनिक फूड प्रोसेसिंग एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के साथ पाँच नए मेगा फूड पार्क, 10 औद्योगिक पार्क तथा 100 एमएसएमई पार्क स्थापित करना, सात लाख लोगों को उद्योग-संबंधी कौशल प्रशिक्षण देना, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय की स्थापना तथा सभी जिलों में एमएसएमई केंद्र खोलना शामिल है। साथ ही स्थानीय उत्पादों के निर्यात और बाजार सुविधा को भी सुदृढ़ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के अंतर्गत कुल 44,073 उद्यमियों को प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई गई है, जिससे राज्य में स्वयं का उद्योग स्थापित करने के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

बिहार को पूर्वी भारत का टेक-हब बनाने के उद्देश्य से डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, मेगा टेक सिटी तथा फिनटेक सिटी की स्थापना हेतु कार्य योजना तैयार कर उसके क्रियान्वयन के लिए शीर्ष समिति का गठन किया गया है। राज्य को ‘वैश्विक बैकएंड-हब’ तथा ‘ग्लोबल वर्कप्लेस’ के रूप में विकसित करने के लिए भी निरंतर अनुश्रवण की व्यवस्था की गई है।

गयाजी जिले के डोभी में लगभग 1,700 एकड़ क्षेत्र में फैले इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) की स्थापना प्रक्रिया तीव्रता से आगे बढ़ रही है और शीघ्र ही इसका शुभारंभ किया जाएगा। साथ ही राज्य के 29 जिलों में 14,036 एकड़ भूमि पर IMC मॉडल पर आधारित 31 नए अत्याधुनिक औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे, जिनमें टेक्सटाइल एवं फ़ार्मा जैसे 10 सेक्टर-विशेष पार्क भी शामिल होंगे। इस दिशा में कुल 26,000 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे।

बिहार में उद्योगों की स्थापना के लिए सभी आवश्यक आधारभूत संरचनाएँ उपलब्ध हैं, जैसे— उत्तम सड़क नेटवर्क, रेलवे एवं हवाई मार्ग से उत्कृष्ट सम्पर्कता और निर्बाध विद्युत आपूर्ति। राज्य में कानून का राज स्थापित है और विधि-व्यवस्था की स्थिति अब काफी बेहतर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि राज्य के युवाओं को रोजगार के लिए किसी मजबूरीवश राज्य से बाहर न जाना पड़े।

K k sanjay
Author: K k sanjay

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