बांका: 20 साल से फर्जी डिग्री पर कर रहा था नौकरी, निगरानी विभाग ने शिक्षक को धर दबोचा
बिहार में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ निगरानी विभाग का शिकंजा कसता जा रहा है। ताजा मामला बांका जिले के सुईया थाना क्षेत्र का है, जहां निगरानी विभाग की टीम ने एक फर्जी शिक्षक को गिरफ्तार किया है। आरोपी शिक्षक पिछले दो दशकों से विभाग की आंखों में धूल झोंककर सरकारी वेतन उठा रहा था।
20 साल बाद खुला राज
गिरफ्तार शिक्षक की पहचान भागीरथ कुमार साह के रूप में हुई है, जो बेलहर प्रखंड के रंगा गांव का निवासी है। वह दक्षिणी कसवावसिला पंचायत के प्राथमिक विद्यालय डूमरडीहा में कार्यरत था। जांच में पाया गया कि भागीरथ पिछले करीब 20 वर्षों से फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी कर रहा था।
हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई कार्रवाई
यह गिरफ्तारी पटना उच्च न्यायालय के उस निर्देश के बाद हुई है, जिसमें संदिग्ध शिक्षकों की जांच में तेजी लाने को कहा गया था। इससे पहले कोर्ट ने शिक्षकों को स्वेच्छा से इस्तीफा देने का मौका भी दिया था, लेकिन कई शिक्षकों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। इसी क्रम में पुलिस निरीक्षक लाल मोहम्मद के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी कर रविवार रात आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
न्यायिक हिरासत में भेजा गया
सुईया थानाध्यक्ष कन्हैया झा ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी को बांका कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
शिक्षा विभाग में हड़कंप
बांका जिले में पिछले एक दशक में एक दर्जन से अधिक फर्जी शिक्षकों का भंडाफोड़ हो चुका है। आशंका जताई जा रही है कि अभी भी कई शिक्षक फर्जी शैक्षणिक, जाति, आवासीय या ओबीसी प्रमाणपत्रों के आधार पर स्कूलों में बने हुए हैं।
मुख्य बिंदु:
गिरफ्तार शिक्षक: भागीरथ कुमार साह (प्राथमिक विद्यालय डूमरडीहा)।
आरोप: 20 वर्षों से फर्जी डिग्री पर नौकरी।
जांच टीम: पुलिस निरीक्षक लाल मोहम्मद के नेतृत्व में निगरानी विभाग की कार्रवाई।
विभाग का रुख: फर्जी दस्तावेजों की जांच का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
निगरानी विभाग की इस कड़ी कार्रवाई से जिले के शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।






Total Users : 10086142
Views Today : 1887