Explore

Search

March 24, 2026 11:47 am

बेमौसम बारिश ने किसानों की रीढ़ की हड्डी तोड़कर रख दी, सरकार शीघ्र दें किसानों को क्षतिपूर्ति : इन्द्रदेव सिंह कुशवाहा*

*बेमौसम बारिश ने किसानों की रीढ़ की हड्डी तोड़कर रख दी, सरकार शीघ्र दें किसानों को क्षतिपूर्ति : इन्द्रदेव सिंह कुशवाहा*

संजय भारती

समस्तीपुर। बेमौसम बारिश से फसलों पर बरपाये कहर को लेकर प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल किसान प्रकोष्ठ के महासचिव व चेरिया बरियारपुर विधानसभा के वरिष्ठ राजद नेता इन्द्रदेव सिंह कुशवाहा ने किसानों की क्षतिपूर्ति व आपदा राहत की मांग सरकार से करते हुए कहा कि बीते शुक्रवार की अचानक बदले मौसम ने किसानों की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी है। तेज आंधी, बारिश, वज्रपात, ओलावृष्टि ने कई इलाकों मे जहां खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है वहीं किसानों के बीच गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। उन्होंने बताया बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गेहूं, मकई, आम, लीची, आलू और विभिन्न सब्जी फसलों को व्यापक क्षति हुई है, जिससे किसान आर्थिक संकट और भविष्य की अनिश्चितता से जूझने को मजबूर हो गए हैं। किसान नेता इन्द्रदेव सिंह कुशवाहा ने बताया शुक्रवार शाम को तेज हवा के साथ शुरू हुई बारिश ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया जिससे किसानों के खेतों में पानी भर गया और देखते ही देखते तैयार खड़ी गेहूं और मकई की फसल खेतों में बिछ गई जिससे किसान हकलान हैं। वहीं किसानों का कहना है कटाई के मुहाने पर पहुंच चुकी गेहूं की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। तेज हवा और बारिश से बालियां झुक गईं, जिससे उपज पर सीधा असर पड़ा है। वहीं बागवानी फसलों पर भी इस बेमौसम बारिश का बुरा असर पड़ा है। आम और लीची के पेड़ों से बड़ी संख्या में मंजर और छोटे फल गिर गए हैं। उन्होंने बताया कि इस मौसम में आई तेज आंधी ने बागानों को खासा नुकसान पहुंचाया है। इससे इस वर्ष आम और लीची की पैदावार घटने की आशंका है। इसके अलावा आलू, टमाटर, बैंगन, मिर्च, गोभी समेत कई सब्जी की फसलें भी जलजमाव और ओलावृष्टि की मार से प्रभावित हुई हैं। किसान नेता श्री कुशवाहा ने बताया कि किसानों पर इस बार खेती की लागत बढ़ी हुई थी। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर भारी खर्च करने के बाद फसल तैयार हुई थी, लेकिन अचानक आई प्राकृतिक आपदा ने किसानों की उम्मीदों को झटका दे गया। उन्होंने कहा गेहूं और मकई की फसल से अच्छी आमदनी की उम्मीद किसानों को था, वहीं आम-लीची के बागानों से भी परिवार की आय जुड़ी हुई थी। अब फसल क्षति के कारण किसानों के सामने कर्ज चुकाने और अगली खेती की तैयारी करने का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने जिला प्रशासन एवं बिहार सरकार से मांग की है कि बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और आंधी से हुई फसल क्षति का तत्काल सर्वे कराया जाए। राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम गांव-गांव जाकर वास्तविक नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा दें ताकि किसान आत्मनिर्भरता के साथ अगला फसल करने में सक्षम हो सके।

K k sanjay
Author: K k sanjay

Leave a Comment

विज्ञापन
लाइव क्रिकेट स्कोर
error: Content is protected !!