*शिव परमात्मा और शंकर देवता हैं: पूजा बहन*
ताजपुर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, समस्तीपुर द्वारा प्रखंड के मोतीपुर ठाकुरवाड़ी में आयोजित राजयोग मेडिटेशन शिविर के तीसरे दिन कर्मों की गहन गति से परत दर परत पर्दा हटाते हुए ब्रह्माकुमारी पूजा बहन ने कहा कि कर्म करने के लिए हर एक मनुष्य आत्मा स्वतंत्र है किंतु कर्म करते ही उसके फल के बंधन में वह बंध जाती है। हर कर्म का फल, चाहे वह अच्छा हो या बुरा, आज नहीं तो कल, इस जन्म में या अगले किसी जन्म में अवश्य मिलता ही है। इसलिए कहा भी गया है- कोई लाख करे चतुराई, करम का लेख मिटे न रे भाई!! कर्म से मनुष्य स्वयं को एक क्षण भी छुड़ा नहीं सकता। हमारा एक विचार भी एक तरह का सूक्ष्म कर्म ही है। हमारे हर कर्म के पीछे की हमारी नियत, हमारी भावना कर्म के परिणाम को प्रभावित करती है। हमारे कर्म के मूल में हमारा एक विचार ही होता है इसलिए श्रेष्ठ कर्म के आधार से श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त करने के लिए अपने एक-एक विचार को शुद्ध, सकारात्मक और शक्तिशाली बनाने की आवश्यकता होती है। विचार कर्म में परिणत होता है, कर्मों के आधार से आदत और संस्कार बनते हैं और इस आधार से हमारे भाग्य का निर्माण होता है। अभी परमात्म-ज्ञान से हमारे विचारों का शुद्धिकरण और सशक्तिकरण होता है। इस आधार से हमारे कर्म उच्च कोटि के होते हैं और भाग्य के रूप में श्रेष्ठ भविष्य का निर्माण होता है। अभी इस एक जन्म में ईश्वर की मत पर श्रेष्ठ कर्मों के बीज बोकर हम 21 जन्मों तक स्वर्ग के राज्य-भाग्य के रूप में फल खाते रहते हैं।
उन्होंने शिव और शंकर के बीच के भेद को स्पष्ट करते हुए बताया कि शिव परमधाम निवासी निराकार ज्योति बिंदु स्वरूप ईश्वर हैं, जबकि शंकर सूक्ष्मवतनवासी आकारी देवता। शिव रचयिता हैं और शंकर उनकी रचना हैं। दोनों को एक मानने से हम परमात्मा की सत्य पहचान से विमुख हो गये।
दर्जनों की संख्या में शिविरार्थियों ने ईश्वरीय ज्ञान का रसास्वादन किया। शिविर प्रतिदिन की भांति दोपहर 2:00 से 3:30 बजे तक चलता रहेगा।






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