पटना एम्स में पहली बार लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सफल
पटना। एम्स पटना ने लिवर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में पहली बार लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया। इस प्रक्रिया में मरीज के परिवार की एक महिला ने अपने लिवर का एक हिस्सा दान किया।
डॉक्टरों के अनुसार, मरीज ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस से पीड़ित था और बीमारी के कारण उसका लिवर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। विस्तृत जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद डोनर और मरीज दोनों के लिए ट्रांसप्लांट को सुरक्षित पाया गया।
लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट एक जटिल चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें स्वस्थ डोनर के लिवर का एक हिस्सा निकालकर मरीज में प्रत्यारोपित किया जाता है। लिवर की खासियत यह है कि उसमें दोबारा बढ़ने की क्षमता होती है।
एम्स पटना की सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी टीम के नेतृत्व में यह ट्रांसप्लांट किया गया। इसमें सर्जन, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग और अन्य विशेषज्ञों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एम्स पटना इससे पहले बिहार का पहला डीसिज्ड डोनर लिवर ट्रांसप्लांट भी सफलतापूर्वक कर चुका है। संस्थान के अनुसार, लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रम के तहत शुरुआती पांच पात्र बीपीएल परिवारों के मरीजों को एम्स रिलीफ फंड से आर्थिक सहायता भी दी गई है।
इस सफलता से बिहार और आसपास के राज्यों के गंभीर लिवर रोग से पीड़ित मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब मरीजों को लिवर ट्रांसप्लांट के लिए दूसरे बड़े शहरों का रुख करने की जरूरत कम हो सकती है।

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