ग्राम बंगरहटा में संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ, आचार्य करन अर्जुन जी महाराज ने किया कथा का प्रारंभ
समस्तीपुर।
रामायण सत्संग समिति के तत्वावधान में ग्राम बंगरहटा स्थित ब्रह्मस्थान परिसर में एक सप्ताहीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ श्रद्धा व भक्ति के बीच संपन्न हुआ। कथा के प्रथम दिन अयोध्या धाम से पधारे कथा वाचक आचार्य करन अर्जुन जी महाराज ने भागवत महापुराण के प्रथम श्लोक से कथा का दिव्य प्रारंभ किया।
कथा वाचक ने कहा कि भागवत का प्रथम श्लोक भगवान की वंदना, उनके स्वभाव, उनकी अद्भुत लीलाओं और उनकी महिमा का वर्णन है। उन्होंने कहा— “भागवत को जानना, भगवान को जानने के समान है।”
महाराज श्री ने बताया कि जन्म-जन्मांतर में जब पुण्य प्रबल होता है, तभी ऐसे दिव्य अनुष्ठान सम्पन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा अमर है, और इसे सुनने मात्र से पापी भी पापमुक्त हो जाते हैं। वेदों का सार मानवजाति तक पहुंचाने वाली भागवत पुराण ‘सनातन ज्ञान की पयस्विनी’ है, जो वेदों से प्रवाहित होकर आया है। इसलिए इसे वेदों का सार माना गया है।
कथा के दौरान उन्होंने महापुराण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि सुकदेव जी महाराज ने सर्वप्रथम राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाई थी। तक्षक नाग के दंश से मृत्यु का श्राप मिलने के बाद परीक्षित ने इस कथा को सुना और उसके प्रभाव से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
आचार्य जी ने कहा कि भागवत कथा रूपी अमृत का पान करने से जीवन के सभी पापों का नाश होता है तथा मनुष्य के भीतर दिव्यता का उदय होता है।
एक सप्ताह तक चलने वाली यह कथा प्रतिदिन संध्या समय भक्ति संगीत और प्रवचन के साथ जारी रहेगी






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