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October 25, 2026 10:59 pm

भगवान पर भरोसा करने से जीवन में कभी निराशा नहीं होती: देवी गोरप्रिया

भगवान पर भरोसा करने से जीवन में कभी निराशा नहीं होती: देवी गोरप्रिया

 

खानपुर के बथनाहा गांव में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भाईचारे और धर्ममय जीवन का दिया संदेश

 

 

खानपुर प्रखंड अंतर्गत श्रीपुर गाहर पूर्वी पंचायत के बथनाहा गांव शिव मंदिर परिसर में शनिवार को श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। श्रीधाम वृंदावन से पधारीं कथा वाचिका देवी गोरप्रिया जी ने श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति अटूट विश्वास रखने, धर्म के मार्ग पर चलने और पारिवारिक रिश्तों की मर्यादा बनाए रखने का संदेश दिया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य भगवान पर सच्चा भरोसा करेगा तो जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी उसे निराश होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसलिए भरोसा करना है तो भगवान श्रीराम पर कीजिए। भगवान पर विश्वास रखने वाले व्यक्ति को जीवन में विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है और उसका मन धर्म तथा सद्कर्म की ओर प्रेरित होता है। कथा वाचिका देवी गोरप्रिया जी ने अपने प्रवचन के दौरान महाभारत के प्रसंगों का सुंदर वर्णन करते हुए भाईचारे, आपसी विश्वास और पारिवारिक एकता के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि भाई को कभी अपने भाई के साथ धोखा नहीं करना चाहिए। भाई एक-दूसरे की ताकत होते हैं। जब परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, विश्वास और सहयोग बना रहता है, तब परिवार मजबूत होता है। इसके विपरीत, आपसी ईर्ष्या, छल-कपट और स्वार्थ रिश्तों को कमजोर कर देते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने संबंधों की गरिमा बनाए रखते हुए एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाभारत का प्रसंग केवल एक धार्मिक कथा नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा भी दिखाता है। इसमें पारिवारिक संबंधों, कर्तव्य, धर्म, सत्य और अधर्म के परिणामों के बारे में महत्वपूर्ण सीख मिलती है। मनुष्य को अपने जीवन में दूसरों के प्रति ईमानदारी, प्रेम और सद्भाव का भाव रखना चाहिए। परिवार में आपसी विश्वास और सम्मान बना रहे, इसके लिए सभी को अपने व्यवहार में विनम्रता तथा सहनशीलता अपनानी चाहिए। कथा वाचिका देवी गोरप्रिया जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलकर जीवन जीने की कला सिखाती है। धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्य बोलना, दूसरों की सहायता करना, बड़ों का सम्मान करना, जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील रहना और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना भी धर्म का हिस्सा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे भगवान के प्रति अपनी आस्था बनाए रखें और अपने दैनिक जीवन में धार्मिक शिक्षाओं को अपनाएं। धर्म और सदाचार से ही व्यक्ति के जीवन में शांति, संतोष और सकारात्मकता आती है। धर्म के बिना जीवन अधूरा है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अच्छे कर्म करते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। बथनाहा गांव के शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। कथा श्रवण के लिए गांव के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, बुजुर्ग और युवा पहुंच रहे हैं। कथा के दौरान भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते नजर आते हैं। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालु पूरे मनोयोग से देवी गोरप्रिया जी के प्रवचन सुन रहे हैं और उनके बताए धार्मिक तथा नैतिक संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प ले रहे हैं। ग्रामीणों के सहयोग से आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में लोगों की सहभागिता देखने को मिल रही है। आयोजन का उद्देश्य ग्रामीणों के बीच धार्मिक चेतना, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता को मजबूत करना भी है। कथा के माध्यम से लोगों को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और धर्म के महत्व से परिचित कराया जा रहा है। श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन लाल बहादुर सिंह, जयराम सिंह, राहुल मंडल, रामबाबू सिंह, अजय कुमार, संतोष कुमार, शिक्षक संतोष कुमार, राजू कुमार उर्फ लाला, कमलदेव सिंह, राजू कुमार, दिलीप कुमार, सुरेंद्र सिंह, रमाकांत सिंह, महेश सिंह, रामानंद सिंह, रघुनाथ सिंह, मंगल सिंह, विवेकानंद कुमार, विजय सिंह, सचिन मंडल और रामभरोस मंडल सहित समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से किया जा रहा है। आयोजन में ग्रामीण बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। कथा के तीसरे दिन भी श्रद्धालुओं की उपस्थिति और भक्ति भाव ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।

K k sanjay
Author: K k sanjay

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