बंगरहटा: श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन प्रह्लाद–ध्रुव चरित्र से भक्ति की शक्ति का संदेश
रामायण सत्संग समिति के तत्वावधान में ग्राम बंगरहटा स्थित ब्रह्म स्थान परिसर में आयोजित एक सप्ताहीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ी। कथा वाचन के दौरान कथावाचक आचार्य करन अर्जुन जी महाराज ने भक्त प्रह्लाद और ध्रुव की दिव्य कथाओं के माध्यम से भक्ति की शक्ति और भगवान विष्णु की कृपा का महत्व समझाया।
महाराज जी ने बताया कि भक्त प्रह्लाद, असुर कुल में जन्म लेने के बावजूद, अटूट भक्ति और दृढ़ विश्वास के कारण भगवान विष्णु के परमप्रिय बने। उनके पिता हिरण्यकश्यप द्वारा दी गई यातनाएँ भी उनकी भक्ति को डिगा नहीं सकीं। दूसरी ओर ध्रुव महाराज, एक बाल राजकुमार होते हुए भी, आत्मसम्मान और भक्ति भाव से कठोर तपस्या कर भगवान विष्णु से वरदान प्राप्त करने में सफल हुए।
कथावाचक ने ध्रुव चरित्र का उल्लेख करते हुए प्रसिद्ध चौपाई का पाठ किया—
“ध्रुवँ सगलानि जपेउ हरि नाऊँ।
पायउ अचल अनूपम ठाऊँ॥”
उन्होंने कहा कि यह चौपाई बताती है कि ध्रुव ने हरि नाम का निरंतर जप कर स्थायी और अद्वितीय स्थान प्राप्त किया।
कथा पंडाल में भक्तिरस से सराबोर वातावरण रहा। श्रद्धालु भजन-कीर्तन के साथ कथा में डूबे दिखाई दिए। आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में विभिन्न प्रसंगों की मनोहारी प्रस्तुतियाँ होंगी।






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