हरियाली तीज पर सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत, शिव-पार्वती की पूजा कर मांगा अखंड सौभाग्य
शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत बंधार, बल्लीपुर, रहटौली, भटौरा, रजौर रामभद्रपुर, शंकरपुर, करियन, परशुराम, दसौत, दहियार, बेला, चितौड़ा, लक्ष्मीनिया, बुनियादपुर सहित विभिन्न गांवों में सोमवार को हरियाली तीज यानी हरितालिका तीज का पर्व श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने दिनभर व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की तथा अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से तीज व्रत की कथा सुनी, जबकि कई घरों में महिलाओं ने स्वयं कथा का पाठ कर विधि-विधान से पूजा संपन्न की। हथौड़ी थाना परिसर में थाना अध्यक्ष मौसम सहित अन्य महिलाओं ने भी तीज का व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा की। शंकरपुर पंचायत की मुखिया विभा कुमारी एवं रानीपरती पंचायत के उप मुखिया मनीषा कुमारी सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी तीज व्रत किया। सुबह से ही व्रती महिलाओं में पर्व को लेकर उत्साह देखा गया। घरों में साफ सफाई के बाद पूजा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया। महिलाओं ने नए वस्त्र धारण कर हाथों में मेहंदी लगाई और पारंपरिक श्रृंगार कर पूजा की तैयारी की। कई स्थानों पर पंडितों द्वारा विधि-विधान से पूजन कराया गया तथा महिलाओं को हरितालिका तीज व्रत की कथा सुनाई गई। पूजन के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें बेलपत्र, फूल, फल, पान, सुपारी, अक्षत, चंदन, कुमकुम, सिंदूर, धूप, दीप, नैवेद्य और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई। व्रती महिलाओं ने माता पार्वती को सुहाग की सामग्री भी चढ़ाई। इसमें मेहंदी, चूड़ी, बिछिया, कंघी, माहौर, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, काजल, चुनरी आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे। नारियल, श्रीफल, कलश, अबीर, चंदन, घी, तेल, कपूर और दीपक से भी पूजा की गई। पूजा के बाद महिलाओं ने भगवान शिव और माता पार्वती की आरती उतारी और अपने परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना
पंडित शशि झा ने बताया कि हरितालिका तीज का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी मान्यता के कारण सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत करती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी मनवांछित वर की प्राप्ति की कामना से इस व्रत को श्रद्धापूर्वक रखती हैं।
उन्होंने बताया कि हरितालिका तीज में निर्जला व्रत का विशेष महत्व है। व्रती महिलाएं पूरे दिन अन्न-जल का त्याग कर भगवान शिव एवं माता पार्वती का ध्यान करती हैं और तीज व्रत की कथा का श्रवण करती हैं। पूजा के लिए कई जगह गीली काली मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाई गई। प्रतिमा को लकड़ी के पाटे पर पीले कपड़े के ऊपर स्थापित कर विधिवत पूजा की गई। पूजा स्थल पर केले का पत्ता, बेलपत्र, फूल, फल, बताशा, मेवा, कपूर, कुमकुम और अन्य पूजन सामग्री रखी गई।
पंडित शशि झा ने कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि दांपत्य जीवन में प्रेम, समर्पण, विश्वास और पारिवारिक एकता का भी संदेश देता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से तीज व्रत करने वाली सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है और उनके पति की आयु लंबी होती है। तीज के दिन वस्त्र, सुहाग सामग्री तथा अन्य वस्तुओं के दान का भी विशेष महत्व माना गया है। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने बड़ों का आशीर्वाद लिया और प्रसाद ग्रहण किया। पूरे क्षेत्र में दिनभर तीज पर्व को लेकर भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।

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