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August 26, 2026 10:38 pm

एनीमिया पर प्रभावी नियंत्रण को 75 दिवसीय विशेष अभियान, स्वास्थ्यकर्मियों को स्क्रीनिंग से उपचार व फॉलो-अप तक की दी गई जानकारी

एनीमिया पर प्रभावी नियंत्रण को 75 दिवसीय विशेष अभियान, स्वास्थ्यकर्मियों को स्क्रीनिंग से उपचार व फॉलो-अप तक की दी गई जानकारी

 

 

 

एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत एनीमिया की रोकथाम, समय पर पहचान, उपचार और नियमित फॉलो-अप को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की ओर से 25 अगस्त से 30 नवंबर तक 75 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शिवाजीनगर के तत्वावधान में राधा कृष्ण मंडल गोविंद गोस्वामी महाविद्यालय भवन के सभागार में एएनएम, सीएचओ, जीएनएम एवं आरबीएसके टीम के सदस्यों के लिए विशेष ओरिएंटेशन सह क्षमता-वर्धन सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुमित कुमार ने की, जबकि संचालन स्वास्थ्य प्रबंधक अमानुल्ला ने किया।

स्टेट हेल्थ सोसाइटी एवं जिला स्वास्थ्य समिति समस्तीपुर के निर्देशानुसार आयोजित प्रशिक्षण सत्र में स्वास्थ्यकर्मियों को 75-दिवसीय विशेष अभियान की रूपरेखा, निर्धारित गतिविधियों और उनकी जिम्मेदारियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान एनीमिया की स्क्रीनिंग, संभावित मामलों की समय पर पहचान, उपचार एवं प्रबंधन प्रोटोकॉल, नियमित फॉलो-अप, गंभीर मामलों के रेफरल तथा रियल-टाइम रिपोर्टिंग की प्रक्रिया के बारे में स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया।अधिकारियों ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थान के साथ-साथ समुदाय स्तर पर एनीमिया की प्रभावी पहचान और प्रबंधन सुनिश्चित करना है। इसके लिए फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। स्वास्थ्यकर्मियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उनकी स्क्रीनिंग कराने, एनीमिया से प्रभावित लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने तथा उपचार के बाद नियमित निगरानी रखने पर विशेष जोर दिया गया।

एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत बच्चों, किशोर-किशोरियों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं तथा प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाता है। प्रशिक्षण में स्वास्थ्यकर्मियों को बताया गया कि विभिन्न आयु एवं जोखिम समूहों में एनीमिया की समय पर जांच एवं पहचान के साथ प्रभावित लाभार्थियों को आवश्यकतानुसार उचित उपचार उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। आयरन-फोलिक एसिड की अनुपूरक खुराक तथा आवश्यकता के अनुसार कृमिनाशक दवा के सेवन को बढ़ावा देने के लिए भी लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया।सत्र में स्वास्थ्यकर्मियों को एनीमिया से बचाव के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार, पोषण तथा स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार में सकारात्मक बदलाव के लिए समुदाय को जागरूक करने की आवश्यकता बताई गई। अधिकारियों ने कहा कि केवल एनीमिया की पहचान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित व्यक्ति को निर्धारित उपचार दिलाना, उसके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करना और आवश्यकता पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य संस्थान में समय पर रेफर करना भी उतना ही जरूरी है।

विशेष अभियान के दौरान गंभीर एनीमिया के मामलों की शीघ्र पहचान और उचित प्रबंधन पर विशेष बल दिया जाएगा। स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देशित किया गया कि गंभीर स्थिति वाले मरीजों के रेफरल में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही उपचार प्राप्त कर रहे लाभार्थियों का नियमित फॉलो-अप करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि वे निर्धारित दवाओं और अनुपूरक का सेवन कर रहे हैं।

अभियान की प्रगति की निगरानी के लिए रियल-टाइम रिपोर्टिंग व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण बताया गया। स्वास्थ्यकर्मियों को अभियान से जुड़ी गतिविधियों की सही, नियमित और समयबद्ध रिपोर्टिंग करने के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि आंकड़ों की सही रिपोर्टिंग से अभियान की प्रगति का आकलन करने और जरूरत के अनुसार आगे की रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

प्रशिक्षण के दौरान बीएचएम एवं पिरामल प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। उन्होंने अभियान के उद्देश्य, निर्धारित गतिविधियों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिभागियों को निर्धारित लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए आपसी समन्वय और सक्रिय सहभागिता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।कार्यक्रम के अंत में सभी एएनएम, सीएचओ, जीएनएम एवं आरबीएसके टीम के सदस्यों से अपील की गई कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में एनीमिया की समय पर पहचान, उचित उपचार, नियमित फॉलो-अप और जागरूकता गतिविधियों को प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि 75-दिवसीय विशेष अभियान के माध्यम से एनीमिया की रोकथाम एवं नियंत्रण से संबंधित सेवाओं को अधिक प्रभावी ढंग से समुदाय तक पहुंचाया जाए। स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रिय भागीदारी से अभियान को सफल बनाने के साथ एनीमिया के मामलों में कमी लाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा सकेगा। एनीमिया मुक्त भारत का मूल संदेश है—समय पर पहचान, सही उपचार और निरंतर फॉलो-अप से एनीमिया पर प्रभावी नियंत्रण।

K k sanjay
Author: K k sanjay

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