शिवाजीनगर में वार्षिक परीक्षा शुरू, ब्लैकबोर्ड पर लिखकर हो रही परीक्षा | छात्र परेशान
ई-शिक्षा कोष से 45 मिनट पहले भेजे जा रहे प्रश्नपत्र, ब्लैकबोर्ड पर लिखकर ली जा रही परीक्षा
समस्तीपुर जिले के शिवाजीनगर प्रखंड में गुरुवार से कक्षा एक से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं का वार्षिक मूल्यांकन शुरू हो गया। यह परीक्षा राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद पटना के दिशा-निर्देशन में आयोजित की जा रही है। इस बार परीक्षा के पैटर्न में बदलाव होने से छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों को भी कई तरह की व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बताया गया है कि पहले शिक्षा विभाग की ओर से प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका दोनों छपवाकर सीधे विद्यालयों को उपलब्ध कराए जाते थे। इससे परीक्षा संचालन में काफी सहूलियत रहती थी। लेकिन वर्ष 2026 के वार्षिक मूल्यांकन में केवल उत्तर पुस्तिका ही स्कूलों को दी गई है, जबकि प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से लगभग 45 मिनट पहले ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से भेजे जा रहे हैं। इसके बाद शिक्षकों को ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिखकर विद्यार्थियों से परीक्षा दिलानी पड़ रही है।
नई व्यवस्था के कारण कई विद्यालयों में छात्रों को प्रश्न समझने और लिखने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर छात्रों को पहले प्रश्न कॉपी में लिखना पड़ा और उसके बाद उत्तर लिखना शुरू करना पड़ा, जिससे समय की भी कमी महसूस हुई। खासकर छोटे बच्चों के लिए ब्लैकबोर्ड से प्रश्न पढ़कर लिखना काफी मुश्किल साबित हो रहा है।
वार्षिक मूल्यांकन के पहले दिन प्रथम पाली में कक्षा तीन से पांच के विद्यार्थियों की पर्यावरण अध्ययन तथा कक्षा छह से आठ के छात्रों की सामाजिक विज्ञान विषय की लिखित परीक्षा आयोजित की गई। वहीं दूसरी पाली में कक्षा एक एवं दो के विद्यार्थियों की भाषा (हिंदी/उर्दू) विषय की मौखिक परीक्षा ली गई।
प्रखंड के कुल 125 प्राथमिक, उत्क्रमित एवं मध्य विद्यालयों में यह वार्षिक मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की जा रही है, जिसमें करीब 31 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे हैं। परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों में उत्साह देखा गया, हालांकि बदले पैटर्न के कारण कई जगहों पर असमंजस की स्थिति भी बनी रही।
इस दौरान प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी Ram Janam Singh ने विभिन्न विद्यालयों का दौरा कर परीक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया और शिक्षकों को विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप परीक्षा संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
शिक्षकों का कहना है कि प्रखंड के कई विद्यालयों में कमरों की कमी है और एक ही कमरे में दो से तीन कक्षाओं का संचालन करना पड़ता है। ऐसे में डिजिटल माध्यम से प्रश्नपत्र भेजने और ब्लैकबोर्ड पर लिखकर परीक्षा लेने की व्यवस्था कई जगहों पर चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है।
प्रधानाध्यापक बालमुकुंद सिंह, रामनाथ पंडित, देवानंद कामत, सुशील कुमार, नीलू कुमारी, संतोष कुमार, मोहम्मद अब्दुल्ला, हीरानंद झा, मोहम्मद जैनुद्दीन, सरिता कुमारी, संजीत पासवान, संजीव कुमार सिंह, राजकुमार मुखिया, मृत्युंजय कुमार सिंह, उमेश प्रसाद सिंह, शांति भूषण, अरुण कुमार पासवान, संजीव कुमार, रामबाबू सिंह और प्रमोद पासवान सहित कई शिक्षक परीक्षा संचालन में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।
शिक्षकों का कहना है कि नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए विद्यालयों में आधारभूत संसाधनों की उपलब्धता और बेहतर समय प्रबंधन पर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि छात्रों को परीक्षा के दौरान अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। वहीं शिक्षा विभाग का मानना है कि डिजिटल प्रणाली से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा रहा है।






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