बिहार में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का बड़ा एक्शन, तीन डॉक्टरों पर विभागीय कार्रवाई शुरू
पटना: बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के निर्देश पर पटना के लोकनायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के तीन चिकित्सकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। डॉक्टरों पर ड्यूटी से अनुपस्थित रहने, मरीजों को निजी अस्पताल भेजने और इलाज में लापरवाही बरतने जैसे आरोप लगे हैं।
औचक निरीक्षण के बाद हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने 7 जुलाई 2026 को पटना के राजवंशीनगर स्थित एलएनजेपी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान मिली शिकायतों के आधार पर तीन चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी।
तीनों डॉक्टरों पर क्या हैं आरोप?
– डॉ. राज किशोर रौशन: रोस्टर के अनुसार दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और निजी क्लिनिक चलाने के कारण ड्यूटी से गायब रहने का आरोप है।
– डॉ. श्याम किशोर: अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों को सादे कागज पर अपने निजी अस्पताल जाने के लिए बाध्य करने का आरोप लगाया गया है।
– डॉ. अमरनाथ प्रसाद: इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण नहीं करने और उन्हें बाहर से दवा लाने के लिए मजबूर करने की शिकायत मिली थी।
एक सप्ताह के भीतर देना होगा जवाब
स्वास्थ्य विभाग ने तीनों चिकित्सकों को अलग-अलग ज्ञापन जारी कर आरोपों से संबंधित विवरण, साक्ष्य और दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। सभी को एक सप्ताह के भीतर लिखित जवाब देने का निर्देश दिया गया है। डॉक्टरों को यह भी बताना होगा कि वे किन आरोपों को स्वीकार करते हैं और किनका खंडन करते हैं। वे चाहें तो व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान अपना पक्ष भी रख सकते हैं।
जवाब नहीं देने पर साक्ष्यों के आधार पर होगी जांच
विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध साक्ष्यों और अभिलेखों के आधार पर विभागीय जांच आगे बढ़ाई जाएगी। आरोपों की पुष्टि और अंतिम कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय होगी।
सरकारी अस्पतालों में लापरवाही पर सख्ती का संदेश
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर शुरू हुई इस कार्रवाई को सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभागीय कार्रवाई से यह संदेश दिया गया है कि ड्यूटी में लापरवाही, मरीजों को निजी अस्पताल जाने के लिए बाध्य करने और उचित इलाज नहीं करने संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।
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