एक सप्ताह बाद पकड़ा गया आतंक का पर्याय बना बंदर, 30 से अधिक लोगों को काटकर किया था घायल
बिहार के समस्तीपुर जिले के शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत बल्लीपुर पंचायत में करीब एक सप्ताह से आतंक का पर्याय बने बंदर को आखिरकार सोमवार की सुबह वन विभाग की टीम ने पकड़ लिया। बंदर के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। बताया जाता है कि पिछले करीब एक सप्ताह से बंदर गांव की गलियों और आसपास के क्षेत्रों में घूम रहा था तथा लोगों को देखते ही अचानक हमला कर देता था। उसके हमले में अब तक 30 से अधिक लोगों के घायल होने की बात ग्रामीणों ने बताई है। बंदर के आतंक के कारण लोग अकेले घर से बाहर निकलने में भी डर रहे थे और बच्चों को लेकर विशेष रूप से भय का माहौल बना हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार बंदर काफी आक्रामक हो गया था। वह अचानक किसी व्यक्ति के पास पहुंचकर हमला कर देता और काटकर घायल कर देता था। हमले के बाद लोग शोर मचाकर उसे भगाने का प्रयास करते, लेकिन कुछ समय बाद वह फिर किसी दूसरी गली या मोहल्ले में पहुंच जाता था। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। कई लोगों ने वन विभाग से बंदर को जल्द पकड़ने की मांग की थी।
ग्रामीणों की सूचना के बाद वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बंदर को पकड़ने के लिए विशेष टीम गठित की। रोसड़ा वन क्षेत्र पदाधिकारी मनीष कुमार भारती के निर्देश पर सिपाही कुंदन कुमार के नेतृत्व में पशु रक्षक हरिओम कुमार चौधरी, नीरज कुमार चौधरी, टुनटुन पासवान, रोशन झा और रामचंद्र मंडल को टीम में शामिल किया गया। टीम करीब छह दिनों से लगातार बल्लीपुर पंचायत और आसपास के इलाकों में बंदर की तलाश कर रही थी। हालांकि बंदर लगातार अपना स्थान बदल रहा था, जिसके कारण उसे पकड़ने में परेशानी हो रही थी। सोमवार की सुबह करीब छह बजे वन विभाग की टीम को बंदर के बल्लीपुर पंचायत में मौजूद होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही टीम तत्काल मौके पर पहुंची और काफी सावधानी के साथ उसकी तलाश शुरू की। काफी प्रयास के बाद बंदर को बल्लीपुर पंचायत के वार्ड पांच में पकड़ लिया गया। वन विभाग की टीम ने बंदर को सुरक्षित रूप से पिंजरे में बंद किया और उसे अपने साथ रोसड़ा ले गई। बंदर के पकड़े जाने की खबर मिलते ही ग्रामीणों में खुशी और राहत का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से बंदर के आतंक के कारण गांव में लोगों का सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया था। सुबह और शाम के समय विशेष रूप से लोग सतर्क रहते थे। अभिभावक बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बच रहे थे। ग्रामीणों का कहना था कि बंदर के लगातार हमले से कई लोग घायल हुए, जिसके बाद वन विभाग को इसकी सूचना दी गई। वन विभाग की टीम ने भी लगातार कई दिनों तक क्षेत्र में निगरानी करते हुए बंदर को पकड़ने का प्रयास किया।
बंदर के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम के प्रति आभार जताया। लोगों का कहना था कि समय रहते बंदर को पकड़ लिए जाने से अब गांव में बना भय का माहौल समाप्त होगा और लोग सामान्य रूप से अपने दैनिक कार्य कर सकेंगे। ग्रामीणों ने भविष्य में भी इस तरह की समस्या उत्पन्न होने पर वन विभाग से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
रोसड़ा वन क्षेत्र पदाधिकारी मनीष कुमार भारती ने बताया कि बल्लीपुर गांव से एक बंदर को पकड़ा गया है। उसे सुरक्षित रूप से बेतिया के जंगल में छोड़ दिया गया है।

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