मानव तन” दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, धनबाद शाखा द्वारा तीन दिवसीय श्री राम चरित मानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ निमी में
“मानव तन” दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, धनबाद शाखा द्वारा तीन दिवसीय श्री राम चरित मानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ दिनांक 28 से 30नवम्बर 2025 तक , नीमी हाट गाछी में आयोजन चल रहा है। आज प्रथम दिवस सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुनीता भारती जी ने मानव जीवन के महत्व को बताते हुए कहा कि प्रकृति का अद्भुत उपहार मानव शरीर (मानव तन) प्रकृति की सबसे जटिल और सुंदर कृतियों में से एक है। यह केवल एक भौतिक संरचना नहीं, बल्कि चेतना, संवेदना और बुद्धि का संगम है। यह तन कोई साधारण वस्तु नहीं, यह ईश्वर की बनाई हुई एक दुर्लभ और अनुपम रचना है। संत,महात्मा, और ग्रंथों ने कहा है – “नर तनु दुर्लभ सदा सुखदाई, जासु बिरंचि अधम गुन गाई।” यह मनुष्य शरीर अत्यंत दुर्लभ है, जिसे स्वयं ब्रह्मा जी ने भी सराहा है।
करोड़ों योनियों के बाद यह तन मिलता है। इसी शरीर के माध्यम से हम धर्म, भक्ति, सेवा और मुक्ति का मार्ग अपना सकते हैं। शरीर केवल भोग विलास के लिए नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान द्वारा आत्मसाक्षात्कार कर परमात्मा की प्राप्ति के लिए मानव तन मिला है।
“भजो रे मन राम गोविंद हरे….” इस तन में ही हमें ईश्वर का स्मरण करना चाहिए ।अंतरात्मा की अनुभूति
यह शरीर वह मंदिर है जिसमें आत्मा निवास करती है। और आत्मा के भीतर ही परमात्मा का वास है। इसलिए तन को पवित्र बनाए रखना आवश्यक है।योग और साधना शरीर स्वस्थ हो, तभी मन शांत होगा और भक्ति की राह प्रशस्त होगी। योग, ध्यान और सच्चे आहार-विहार से शरीर को साधन बनाए।
सदुपयोग बनाम दुरुपयोग
यह तन नश्वर है, परंतु इसका सदुपयोग करके हम अमरत्व की ओर बढ़ सकते हैं। इसलिए समय रहते इस शरीर का उपयोग अच्छे कर्म, सेवा और भक्ति में लगाएं।
गुरु भाई चंदन जी ने कहा कि
सत्संग का सार यही है कि –
“जो तन लागे हरि भजन में, सो तन धन्य कहाए।”
हम सबको चाहिए कि हम इस मानव तन का मान रखें, उसे साधन बनाएं, केवल भोजन, वस्त्र और सुखों तक न सीमित रखें – बल्कि उसे भगवत्स्मरण, सेवा, प्रेम और करुणा से पवित्र करें।
“यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।”
“प्रभुजी थारो तन धन सब कुछ है।”
मंचासिन साध्वी सुनिता भारती जी , गायिका साध्वी महामाया भारती जी, मंजू भारती जी, तबला रंजन जी, चंदन जी द्वारा सुमधुर भजनों को सुनकर भक्तगण भाव विभोर हो उठें।
इस कार्यक्रम के मौके पर गुरु भाई विश्वेर जी, कमलेश जी एवं ग्रामीणों के सहयोग से प्रारंभ हुआ।






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