समस्तीपुर में स्कूल बसों का बड़ा खुलासा – बिना फिटनेस, टैक्स के दौड़ रही गाड़ियां
स्कूल वाहनों की सुरक्षा और नियमों पर उठे सवाल
रोसड़ा अनुमंडल में कई निजी स्कूलों की बसें नियमों की अनदेखी कर रही, बच्चों को ठूसकर ले जाने और टैक्स चोरी का आरोप
बिहार के समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडल के विभिन्न प्रखंड क्षेत्रों में संचालित कई निजी विद्यालयों की बसों के परिचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और समाजसेवियों का आरोप है कि कई स्कूल ऐसे वाहनों से बच्चों का परिवहन करा रहे हैं जो सरकार के तय मापदंडों पर खरे नहीं उतरते।
बताया जा रहा है कि कुछ स्कूलों में ऐसी बसें चलाई जा रही हैं जिनका मुख्य सड़क पर परिचालन नियमों के अनुसार प्रतिबंधित है, इसके बावजूद वे धड़ल्ले से चल रही हैं। इतना ही नहीं, कई जगहों पर बच्चों को माल ढुलाई वाहन की तरह ठूस-ठूसकर ले जाया जाता है, जिससे उनकी सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि कई वाहनों का फिटनेस, इंश्योरेंस और टैक्स भी समय पर नहीं भरा जाता, जिसके कारण सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर, इन वाहनों के जरिए निजी विद्यालयों के संचालकों को दोहरा लाभ मिल रहा है।
परिवहन नियमों के अनुसार टैक्सी नंबर सामान्य बसों का किराया लगभग ₹1.50 प्रति किलोमीटर, डीलक्स बस का ₹1.70 प्रति किलोमीटर, एसी डीलक्स बस का ₹2.00 प्रति किलोमीटर और वोल्वो या लग्जरी बस का ₹2.50 प्रति किलोमीटर निर्धारित माना जाता है। इसके बावजूद कई निजी विद्यालय छात्रों से अधिक शुल्क वसूलने के आरोपों के घेरे में हैं।
इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र के कई समाजसेवियों ने बिहार परिवहन विभाग, बिहार शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि किसी स्कूल की बस नियमों के विरुद्ध पाई जाती है या वाहन डिफॉल्टर है, तो संबंधित विद्यालय के संचालकों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।
समाजसेवियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि स्कूल बसों की नियमित जांच कर नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि छात्र सुरक्षित तरीके से विद्यालय आ-जा सकें।
Author: K k sanjay
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