भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से मांगा जवाब, साक्ष्य सुरक्षित रखने का दिया आदेश
पटना: भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए बिहार सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा की अदालत ने मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है। अगली सुनवाई 28 अगस्त 2026 को होगी।
याचिकाकर्ता आशा देवी, जो भरत तिवारी की मां हैं, की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार ने अदालत में मांग की कि 17 जून 2026 को हुए कथित एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए। साथ ही घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, वीडियोग्राफी, वायरलेस लॉगबुक, स्टेशन डायरी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बॉडी कैमरा फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की अपील की गई।
याचिका में यह भी कहा गया कि पोस्टमार्टम, इंक्वेस्ट और फॉरेंसिक रिपोर्ट की प्रतियां परिजनों को उपलब्ध कराई जाएं तथा मृतक का मोबाइल फोन और जब्त सामान वापस किया जाए। इसके अलावा 16-17 जून की रात बिना महिला पुलिसकर्मी के घर में प्रवेश किए जाने के आरोप की भी जांच कराने की मांग की गई।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया और सभी संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।
गौरतलब है कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ के दौरान भरत भूषण तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि भरत ने हथियार डाल दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने गोली मार दी। इस मामले की न्यायिक जांच पहले से जारी है।

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