बिहार पंचायत चुनाव: मुखिया बनने का सपना देख रहे हैं तो पहले जान लें ये नियम, इन लोगों पर चुनाव लड़ने की है रोक
बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में अभी से राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। मौजूदा मुखिया और सरपंचों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाला है। इसके बाद नए सिरे से पंचायत चुनाव कराए जाने की तैयारी है। चुनाव से पहले पंचायतों का परिसीमन भी किया जाएगा, जिसमें 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा।
परिसीमन के बाद पंचायतों और वार्डों की संख्या में बदलाव हो सकता है। ऐसे में मुखिया पद के संभावित उम्मीदवार अभी से लोगों से संपर्क करने में जुट गए हैं। हालांकि, हर व्यक्ति मुखिया का चुनाव नहीं लड़ सकता। बिहार पंचायत राज अधिनियम के तहत उम्मीदवारों के लिए कुछ जरूरी पात्रताएं और अयोग्यताएं निर्धारित हैं।
कौन नहीं लड़ सकता मुखिया का चुनाव?
21 वर्ष से कम उम्र: मुखिया पद के लिए उम्मीदवार की उम्र कम से कम 21 वर्ष होना जरूरी है। इससे कम उम्र का व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता।
मतदाता सूची में नाम जरूरी: उम्मीदवार का नाम संबंधित मतदाता सूची में होना आवश्यक है। मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर चुनाव लड़ने में कानूनी अड़चन आ सकती है।
भारत का नागरिक नहीं होने पर: भारतीय नागरिक नहीं होने वाला व्यक्ति पंचायत चुनाव में मुखिया पद के लिए उम्मीदवार नहीं बन सकता।
सरकारी कर्मचारी: केंद्र या राज्य सरकार की सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के साथ-साथ कानून के तहत अयोग्य ठहराए गए स्थानीय निकाय कर्मी भी चुनाव नहीं लड़ सकते।
सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान के कर्मचारी: सरकार या स्थानीय प्राधिकरण से आर्थिक सहायता प्राप्त संस्थानों में कार्यरत कुछ कर्मचारियों पर भी चुनाव लड़ने की रोक हो सकती है।
पंचायत के अधीन लाभ का पद: पंचायत के अधीन वेतन या लाभ का पद रखने वाला व्यक्ति भी अयोग्य हो सकता है।
अदालत द्वारा मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित व्यक्ति: सक्षम न्यायालय द्वारा मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए पात्र नहीं होता।
कदाचार के कारण सरकारी नौकरी से बर्खास्त: सरकारी सेवा से कदाचार के आधार पर बर्खास्त किए गए व्यक्ति को, यदि कानून के तहत सार्वजनिक सेवा के लिए अयोग्य घोषित किया गया है, तो चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है।
आपराधिक मामले में सजा: अदालत से गंभीर आपराधिक मामले में निर्धारित अवधि की सजा पाने वाले व्यक्ति पर भी चुनाव लड़ने की अयोग्यता लागू हो सकती है। हालांकि, केवल FIR दर्ज होना या मामला अदालत में लंबित होना अपने आप में चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं बनाता।
आरक्षित सीट पर अलग नियम
यदि किसी पंचायत में मुखिया का पद अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) या महिला के लिए आरक्षित है, तो उम्मीदवार को उस आरक्षित श्रेणी की पात्रता पूरी करनी होगी। इसलिए चुनाव से पहले संबंधित पंचायत की आरक्षण स्थिति और आधिकारिक अधिसूचना की जानकारी लेना जरूरी होगा।
नोट: पंचायत चुनाव की अंतिम पात्रता, आरक्षण और अयोग्यता संबंधी नियम चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना और लागू बिहार पंचायत राज कानून के अनुसार तय होंगे।

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