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September 5, 2026 11:25 am

जन्माष्टमी पर भक्ति में डूबा शिवाजीनगर, कृष्ण-राधा की मनमोहक झांकियों ने मोहा मन

जन्माष्टमी पर भक्ति में डूबा शिवाजीनगर, कृष्ण-राधा की मनमोहक झांकियों ने मोहा मन

 

बिहार के समस्तीपुर जिले के शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व शुक्रवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। प्रखंड के बांधर, बल्लीपुर, बाघोपुर, परशुराम, रहटौली, मधुरापुर, भटौरा, रजौर, रामभद्रपुर, रमौल, डुमरा, बहादुरपुर, लक्ष्मीनिया, कांकर, बुनियादपुर, दहियार, रन्ना बेला, दसौत, बन्दा, बोरज, परसा, सरहिला, कर्पूरी चौक, बंडीहा, रानीपरती सहित अन्य गांवों में घरों, मंदिरों और पूजा स्थलों पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना की गई। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। घंटों की आवाज और भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। जन्माष्टमी को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। महिला, पुरुष और बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। पर्व को लेकर बाजारों में भी दिनभर चहल-पहल रही। लोगों ने पूजा सामग्री, फल, मिठाई, माखन-मिश्री, नए वस्त्र और सजावट की सामग्री की जमकर खरीदारी की। शाम होते ही मंदिरों और पूजा स्थलों को आकर्षक रोशनी, रंग-बिरंगे फूलों और अन्य सजावटी सामानों से सजाया गया। घरों में भी भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को नए वस्त्र पहनाकर विशेष श्रृंगार किया गया।

कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का सबसे आकर्षक केंद्र बच्चों द्वारा प्रस्तुत कृष्ण-राधा की मनमोहक झांकियां रहीं। बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को धारण कर उनकी नटखट लीलाओं को प्रस्तुत किया। कान्हा के रूप में सजे बच्चों की मासूम अदाओं और मनमोहक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कृष्ण के रूप में आण्विक मिश्रा, आणवित मिश्रा, रोशन कुमार, सरोज कुमार, जितेंद्र कुमार सहित अन्य बच्चों ने आकर्षक वेशभूषा में लोगों का ध्यान खींचा। वहीं राधा के रूप में बांधर गांव की वामिका रानी, रिषिका कुमारी, शिवांगी, जयश्री और मीठी प्यारी सहित अन्य बच्चियों ने अपनी मनमोहक वेशभूषा से सभी को आकर्षित किया। झांकियों के दौरान बच्चों की प्रस्तुति देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। पंडित दुख हरण झा उर्फ फलाहारी बाबा, शशि झा, पप्पू झा तथा महंत श्री 1008 रामकृष्ण रामायणी दास महाराज ने बताया कि हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीहरि विष्णु ने भगवान श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। भगवान कृष्ण ने अत्याचारी कंस के अत्याचार से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए अवतार लिया और बाद में गोकुल पहुंचकर अपनी बाल लीलाओं से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। इसी कारण जन्माष्टमी का पर्व हर वर्ष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। मंदिरों में देर रात तक भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अवसर पर श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की और प्रसाद का वितरण किया। आधी रात के समय मंदिर परिसर और घरों में जयघोष गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने “जय कन्हैया लाल की”, “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” और “राधे-राधे, श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी” के उद्घोष लगाए। इससे पूरा क्षेत्र कृष्ण भक्ति में सराबोर हो गया।

जन्माष्टमी के अवसर पर बच्चों में खासा उत्साह रहा। कहीं बाल गोपाल को पालने में झुलाया गया तो कहीं कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित झांकियां सजाई गईं। लोगों ने एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। देर रात तक मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही और भक्ति गीतों से वातावरण गूंजता रहा। पर्व को लेकर गांवों में उत्सव जैसा माहौल रहा।

K k sanjay
Author: K k sanjay

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