भूकंप से बचाव के लिए बच्चों को दिया प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल कर समझाए सुरक्षा के उपाय
शिवाजीनगर ।मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सितंबर माह के तृतीय शनिवार को शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत सभी प्राथमिक, मध्य एवं उत्क्रमित विद्यालयों में सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यालयों में बच्चों को भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, सुरक्षित व्यवहार तथा आपात स्थिति में बचाव एवं प्राथमिक उपचार के तरीकों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि मॉक ड्रिल कराकर आपदा के समय तत्काल उठाए जाने वाले कदमों का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। विद्यालयों में आयोजित सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को भूकंप के खतरे के प्रति जागरूक करना और आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय सूझबूझ एवं सतर्कता के साथ स्वयं तथा आसपास के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए तैयार करना रहा। शिक्षकों ने बच्चों को बताया कि भूकंप अचानक आने वाली आपदा है। ऐसी स्थिति में घबराहट से नुकसान बढ़ सकता है। इसलिए भूकंप के दौरान शांत रहते हुए सुरक्षित स्थान की ओर जाने तथा निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन करने की आवश्यकता है।
मॉक ड्रिल के दौरान बच्चों को ड्रॉप, कवर और होल्ड की तकनीक समझाई गई। बताया गया कि भूकंप के झटके महसूस होने पर पहले नीचे झुककर स्वयं को सुरक्षित करना चाहिए, इसके बाद मजबूत मेज या टेबल के नीचे जाकर सिर एवं गर्दन को ढकना चाहिए और कंपन समाप्त होने तक मजबूत सहारे को पकड़कर रखना चाहिए। यदि किसी भवन से सुरक्षित रूप से बाहर निकलना संभव हो तो खुले एवं सुरक्षित स्थान पर जाने की जानकारी भी दी गई। बच्चों को यह भी बताया गया कि भूकंप के समय अलमारी, शीशे, पंखे, खिड़की तथा अन्य भारी वस्तुओं के पास खड़ा होने से बचना चाहिए, क्योंकि कंपन के दौरान इनके गिरने से चोट लगने का खतरा रहता है।शिक्षकों ने भूकंप के बाद की स्थिति को लेकर भी बच्चों को जागरूक किया। बताया गया कि आपदा के बाद भवन से बाहर निकलते समय टूटे हुए बिजली के तार, गिरी हुई दीवार, मलबे तथा क्षतिग्रस्त भवन से दूरी बनाए रखना जरूरी है। बिना जांचे किसी क्षतिग्रस्त भवन में प्रवेश नहीं करना चाहिए। बच्चों को यह भी समझाया गया कि संकट की स्थिति में अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए तथा शिक्षकों, अभिभावकों और राहत-बचाव दल के निर्देशों का पालन करना चाहिए।कार्यक्रम के दौरान प्राथमिक उपचार के संबंध में भी बच्चों को जानकारी दी गई। मामूली चोट लगने पर पट्टी बांधने, खून निकलने की स्थिति में घाव पर दबाव देने तथा गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के मामले में तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने के बारे में बताया गया। इसके अलावा किसी व्यक्ति के मलबे में फंसने की स्थिति में बिना सोचे-समझे उसे खींचने के बजाय प्रशिक्षित लोगों अथवा बचाव दल की सहायता लेने की जानकारी दी गई। शिक्षकों ने बच्चों को यह संदेश भी दिया कि आपदा के समय एक-दूसरे की मदद करना और कमजोर बच्चों, छोटे बच्चों एवं घायल लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में सहयोग करना महत्वपूर्ण है।
सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम के दौरान विद्यालयों में बच्चों के बीच क्या करें और क्या न करें को लेकर भी विशेष रूप से चर्चा की गई। शिक्षकों ने वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि आपदा के समय थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। वहीं समय पर सही निर्णय लेकर और सुरक्षा नियमों का पालन कर जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है। बच्चों ने भी मॉक ड्रिल में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए आपदा की स्थिति में सुरक्षित रहने के विभिन्न तरीकों का अभ्यास किया।
प्रखंड के सभी विद्यालयों में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक, नोडल शिक्षक एवं अन्य शिक्षक सक्रिय रूप से शामिल रहे। पूर्व बीआरपी सह एचएम बालमुकुंद सिंह, सत्यनारायण आर्य, अरुण पासवान, सुभाष सिंह, संतोष कुमार, नीलू कुमारी, रामनाथ पंडित, हीरानंद झा, अवधेश चौधरी, मदन कुमार, मो. अब्दुल्लाह, अजय कुमार राय, संजीव कुमार, रामबाबू सिंह, संजीत कुमार, सरिता कुमारी, मोहम्मद जैनुद्दीन, प्रमोद पासवान, प्रदीप कुमार, उमेश प्रसाद राय, शांति भूषण, देवानंद कामत, बिहारी दास, मृत्युंजय कुमार सिंह सहित अन्य प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों ने अपने-अपने विद्यालयों में कार्यक्रम का नेतृत्व किया।
शिक्षकों ने बच्चों को आपदा के समय मानसिक रूप से मजबूत रहने और घबराहट से बचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में नियमित रूप से आपदा प्रबंधन से जुड़े प्रशिक्षण एवं मॉक ड्रिल आयोजित होने से बच्चों में आपदा से निपटने की व्यावहारिक समझ विकसित होती है। ऐसे प्रशिक्षण से बच्चे स्वयं को सुरक्षित रखने के साथ जरूरत पड़ने पर परिवार एवं आसपास के लोगों की सहायता करने में भी सक्षम बन सकते हैं। सुरक्षित शनिवार अभियान के माध्यम से बच्चों में आपदा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।

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