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October 27, 2026 10:47 pm

प्राथमिक विद्यालय कनखरिया में डिस्लेक्सिया के प्रति बच्चों को किया जागरूक, निकाली प्रभात फेरी

प्राथमिक विद्यालय कनखरिया में डिस्लेक्सिया के प्रति बच्चों को किया जागरूक, निकाली प्रभात फेरी

 

चित्रांकन प्रतियोगिता में बच्चों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग, प्रधान शिक्षक ने बताया पढ़ने-लिखने में होने वाली कठिनाइयों को समझने का महत्व

 

शिवाजीनगर

 

बच्चों में सीखने की प्रक्रिया को सहज, सरल और समावेशी बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत मधुरापुर पंचायत के प्राथमिक विद्यालय कनखरिया में डिस्लेक्सिया विषय पर जागरूकता गतिविधि का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों को डिस्लेक्सिया के अर्थ, उसके लक्षण, कारण और इससे प्रभावित बच्चों की सहायता करने के तरीकों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के तहत बच्चों ने प्रभात फेरी निकालकर लोगों को जागरूक किया। इसके बाद विद्यालय परिसर में चित्रांकन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्रधान शिक्षक मोहम्मद अब्दुल्लाह ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि डिस्लेक्सिया एक प्रकार का विशिष्ट अधिगम विकार है, जो मुख्य रूप से पढ़ने, शब्दों को पहचानने, उनकी ध्वनियों को समझने तथा वर्तनी लिखने की क्षमता को प्रभावित करता है। यह मस्तिष्क द्वारा भाषा को समझने और संसाधित करने के तरीके में अंतर के कारण होता है। इससे प्रभावित बच्चों को अक्षरों, शब्दों और ध्वनियों के बीच संबंध स्थापित करने में सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक कठिनाई हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिस्लेक्सिया का संबंध किसी बच्चे की बुद्धिमत्ता, मेहनत या सीखने की इच्छा से नहीं है। ऐसे बच्चे सामान्य अथवा उच्च बौद्धिक क्षमता वाले भी हो सकते हैं। इसे न तो आलस्य समझना चाहिए और न ही मानसिक बीमारी। कई बार जानकारी के अभाव में बच्चों की पढ़ने-लिखने की कठिनाइयों को उनकी लापरवाही मान लिया जाता है, जबकि उन्हें सही मार्गदर्शन, धैर्य और विशेष शिक्षण पद्धति की आवश्यकता होती है।

प्रधान शिक्षक ने बताया कि डिस्लेक्सिया के प्रमुख लक्षणों में शब्दों को पहचानने में परेशानी होना, पढ़ते समय अक्षरों या शब्दों में भ्रम होना, शब्दों को छोड़ देना, धीमी गति से पढ़ना तथा एक ही पंक्ति को बार-बार पढ़ना शामिल है। इसके अलावा लिखते समय वर्तनी की गलतियां करना, अक्षरों और शब्दों को सही क्रम में लिखने में कठिनाई होना तथा तुकबंदी वाले शब्दों को याद रखने में परेशानी होना भी इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। हालांकि, केवल इन लक्षणों के आधार पर किसी बच्चे को डिस्लेक्सिया से प्रभावित नहीं माना जा सकता। इसके लिए विशेषज्ञों द्वारा उचित आकलन जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों में ऐसी कठिनाइयों के शुरुआती संकेत मिलने पर अभिभावकों और शिक्षकों को संवेदनशीलता के साथ कदम उठाना चाहिए। बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करने, उसे डांटने या कमजोर समझने के बजाय उसकी सीखने की जरूरतों को समझना चाहिए। समय पर पहचान, व्यक्तिगत ध्यान, ध्वनि और अक्षरों के अभ्यास, चित्रों तथा अन्य बहु-संवेदी शिक्षण विधियों के माध्यम से बच्चों को पढ़ने-लिखने में काफी मदद मिल सकती है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सलाह और उपयुक्त सहायक तकनीक का भी उपयोग किया जा सकता है।विद्यालय में आयोजित प्रभात फेरी के माध्यम से बच्चों ने जागरूकता का संदेश दिया। वहीं, चित्रांकन प्रतियोगिता ने बच्चों को अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया। शिक्षकों ने गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया कि प्रत्येक बच्चा अपनी गति और तरीके से सीखता है तथा सभी बच्चों को समान अवसर और सहयोग मिलना चाहिए।

इस अवसर पर शिक्षक अनिरुद्ध कुमार, विक्रम सैनी, वीणा कुमारी और प्रतिभा कुमारी सहित अन्य विद्यालय कर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में डिस्लेक्सिया के प्रति समझ विकसित करने के साथ-साथ विद्यालय में सहयोगपूर्ण, संवेदनशील और समावेशी शैक्षणिक वातावरण को बढ़ावा देना रहा।

K k sanjay
Author: K k sanjay

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