पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के इस्तीफे पर पी न्यूज ने जताया शोक, कहा— “सिस्टम सुधारने वाले मजबूत नेतृत्व की कमी महसूस होगी”
पी न्यूज के चीफ एडिटर कृष्ण कुमार संजय बोले— “हमारी खबरों पर होती थी त्वरित कार्रवाई, कई विभागों में दिखा सुधार”
बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव सामने आया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के इस्तीफे के बाद जहां राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है, वहीं डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पी न्यूज के चीफ एडिटर कृष्ण कुमार संजय ने इस पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने इसे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए एक बड़ी क्षति बताया है।
कृष्ण कुमार संजय ने कहा कि नीतीश कुमार का कार्यकाल ईमानदारी, सादगी और सुशासन की मिसाल रहा है। उन्होंने दावा किया कि पी न्यूज द्वारा उजागर किए गए कई मामलों—जैसे पंचायत स्तर पर अनियमितता, शिक्षा विभाग में गड़बड़ी, स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही, जन वितरण प्रणाली (PDS) में भ्रष्टाचार और अवैध खनन—पर सरकार ने गंभीरता से संज्ञान लिया और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की।
उन्होंने विस्तार से बताया कि मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर कई ठोस कदम उठाए गए। इनमें पंचायत के मुखिया और पंचायत सेवकों पर जांच, गड़बड़ी करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई, मिड डे मील में अंडा घोटाले की जांच कर रिकवरी, एक शिक्षक का निलंबन, जन वितरण प्रणाली के डीलर का लाइसेंस रद्द या निलंबन, सड़क निर्माण कार्यों में गड़बड़ी मिलने पर भुगतान में कटौती, और अवैध खनन में शामिल जेसीबी संचालकों पर प्राथमिकी दर्ज कर आर्थिक दंड जैसी कार्रवाइयाँ शामिल हैं।
पी न्यूज के चीफ एडिटर ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में पद का दुरुपयोग नहीं किया और परिवारवाद से दूर रहते हुए शासन चलाया। उनके अनुसार, बिहार के विकास में उनकी भूमिका एक “महान पुरुष” के रूप में दर्ज की जाएगी, जिन्होंने व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही लाने का प्रयास किया।
उन्होंने आगे कहा कि मीडिया और प्रशासन के बीच एक सकारात्मक समन्वय उनके कार्यकाल की बड़ी विशेषता रही, जिससे जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मदद मिली।
अब राज्य की कमान नए नेतृत्व के हाथों में है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि नए मुख्यमंत्री Samrat Choudhary से जनता को काफी उम्मीदें हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे पूर्व मुख्यमंत्री की तरह जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी भूमिका निभाते हैं और प्रशासनिक सुधारों की गति को किस हद तक आगे बढ़ा पाते हैं।
निष्कर्ष:
बिहार में नेतृत्व परिवर्तन के इस दौर में जहां एक ओर राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सुशासन और पारदर्शिता को लेकर जनता और मीडिया की अपेक्षाएं पहले की तरह बनी हुई हैं। ऐसे में नए नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन उम्मीदों पर खरा उतरने की होगी।बताते चले कि नीतीश कुमार के सहयोग से सन2018में बिहार डायरी में पी न्यूज डिजिटल मीडिया का नाम दर्ज किया गया था






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