सिंघिया डिग्री कॉलेज में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित
राजकीय डिग्री महाविद्यालय, सिंघिया, समस्तीपुर में सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उनके जीवन, व्यक्तित्व, कृतित्व और राजनीतिक विचारों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान, संपूर्ण क्रांति के आह्वान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए किए गए उनके प्रयासों को याद किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. सत्येन कुमार ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जीवन त्याग, संघर्ष और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रेरणादायक उदाहरण है। उनका संपूर्ण क्रांति का विचार केवल राजनीतिक परिवर्तन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और नैतिक परिवर्तन की व्यापक परिकल्पना निहित थी। उन्होंने युवाओं से उनके विचारों से प्रेरणा लेने और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।
समकालीन राजनीति पर टिप्पणी करते हुए डॉ. सत्येन कुमार ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से निकले अनेक नेता उनके आदर्शों और सिद्धांतों पर खरे नहीं उतर सके। उन्होंने जिस नैतिकता, जनसेवा, पारदर्शिता और मूल्यपरक राजनीति की कल्पना की थी, उसे व्यवहार में पूरी तरह आत्मसात नहीं किया जा सका। यह स्थिति उनके विचारों और राजनीतिक आचरण के बीच की दूरी को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण को सच्ची श्रद्धांजलि तभी दी जा सकती है, जब उनके आदर्शों को केवल स्मरण करने के बजाय सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक व्यवहार में भी अपनाया जाए।
राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रतीक दीप ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जीवन-परिचय पर प्रकाश डालते हुए उनके संघर्षपूर्ण जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान और भारतीय राजनीति में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके व्यक्तित्व और विचारों से परिचित कराया।
कार्यक्रम की संयोजिका एवं राजनीति विज्ञान विभाग की अपूर्वा कृति ने जयप्रकाश नारायण के राजनीतिक विचारों पर अपनी बात रखी। उन्होंने संपूर्ण क्रांति की अवधारणा और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण की राजनीतिक दृष्टि केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे समाज और व्यवस्था में व्यापक बदलाव के पक्षधर थे।
कार्यक्रम के सह-संयोजक एवं इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. अंकलेश कुमार ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जीवन और उनके विचार आज भी प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने संपूर्ण क्रांति के माध्यम से समाज और राजनीति में बदलाव लाने का प्रयास किया। उनके विचार अन्याय, भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता के विरुद्ध आवाज उठाने की प्रेरणा देते हैं। आज के युवाओं को उनके जीवन से सीख लेते हुए समाज और देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक अवधेश कुमार ने आपातकाल के दौर में लिखी गई जयप्रकाश नारायण की कृति ‘मेरी जेल डायरी’ के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने इस कृति के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों, लोकतांत्रिक अधिकारों, नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक संघर्ष के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस कृति का अध्ययन उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों और लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व को समझने की दृष्टि से उपयोगी है।
कार्यक्रम का मंच संचालन अर्थशास्त्र विभाग की सहायक प्राध्यापिका कल्याणी कुमारी ने किया। अंत में समाजशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक नवनीत कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी प्राध्यापकों, आयोजकों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की संयोजिका राजनीति विज्ञान विभाग की अपूर्वा कृति तथा सह-संयोजक इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. अंकलेश कुमार थे। इस अवसर पर डॉ. कुमारी मनीषा, मिलन कुमार, अन्वेषा कुमारी और कीर्तिमा सिंह सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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