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November 5, 2026 6:23 am

6 साल के मासूम ने जाते-जाते दो अंधेरी जिंदगियों को दी रोशनी

6 साल के मासूम ने जाते-जाते दो अंधेरी जिंदगियों को दी रोशनी

रांची, 23 फरवरी 2026: रांची रिम्स में एक 6 साल के मासूम ने अपने अंगदान के जरिए दो लोगों की जिंदगी में रोशनी भर दी। ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे इस मासूम ने नेत्रदान करके मानवता की मिसाल पेश की।
घटना की मुख्य बातें:
मासूम का नाम सुजीत मुंडा का बेटा, कांके के होचर का निवासी।
गंभीर बीमारी: ब्रेन ट्यूमर, इलाज रांची रिम्स न्यूरोसर्जरी विभाग में चल रहा था।
पिता सुजीत मुंडा ने बेटे की आखों को दान करने का निर्णय लिया।
प्रक्रिया और योगदान:
रिम्स आई बैंक की टीम ने महज तीन घंटे में नेत्रदान की सभी प्रक्रियाएं पूरी की।
यह बच्चा रिम्स के इतिहास में सबसे कम उम्र का नेत्रदाता बन गया।
दो लोगों को मिला जीवन का उपहार:
आलोक कुमार (पलामू) – 6 साल पहले आंखों की रोशनी खो चुके थे।
बसंती महतो (पूर्वी सिंहभूम, 39 वर्ष) – पिछले 6 महीनों से दृष्टिहीन थीं।
प्रत्यारोपण पूरी तरह निःशुल्क किया गया।
पिता का संदेश:
सुजीत मुंडा ने कहा, “मेरा बेटा दुनिया देखना चाहता था। अब उसकी आंखें दूसरों को दुनिया दिखाएंगी।”
यह घटना त्याग, मानवता और इंसानियत की प्रेरणा बन गई है और समाज में सकारात्मक संदेश फैला रही है।

K k sanjay
Author: K k sanjay

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