US Supreme Court Verdict के बाद क्या भारत की रूसी तेल खरीद आसान? Donald Trump की ट्रेड पॉलिसी पर असर
Supreme Court of the United States के हालिया फैसले के बाद भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर नई संभावनाएं बनती दिख रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्णय से अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ट्रेड पॉलिसी विकल्पों पर अंकुश लगा है, जिससे भारत पर संभावित दबाव कम हो सकता है।
📊 क्या कहा विश्लेषकों ने?
Quincy Institute for Responsible Statecraft में ग्लोबल साउथ प्रोग्राम के डायरेक्टर सारंग शिदोरे ने CNBC के कार्यक्रम Inside India में कहा कि भारत रूस के साथ ऊर्जा सहित अपने रणनीतिक रिश्ते बनाए रखेगा।
हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि आयात में कुछ कमी संभव है, लेकिन पूरी तरह बंद होने की संभावना कम है।
एनर्जी डेटा फर्म Kpler के अनुसार, भारत ने फरवरी में अब तक लगभग 11.6 लाख बैरल प्रतिदिन (mbd) रूसी तेल आयात किया है, जो 2025 के औसत 17.1 लाख बैरल प्रतिदिन से कम है।
⚖ कोर्ट के फैसले से बदला समीकरण
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने माना कि International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत बड़े आयात टैरिफ लागू करने की राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित हैं।
केप्लर की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट मुयू जू के अनुसार, इस फैसले के बाद भारत 8 से 10 लाख बैरल प्रतिदिन के बीच रूसी तेल आयात बनाए रख सकता है।
🔙 पहले क्या हुआ था?
पिछले वर्ष डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से कच्चा तेल खरीद के मुद्दे पर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर कुल टैरिफ करीब 50% तक पहुंच गया था।
बाद में एक अंतरिम ट्रेड डील के तहत टैरिफ घटाकर 18% किया गया।
6 फरवरी को एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए 25% अतिरिक्त टैरिफ हटाया गया।
हालांकि भारत और अमेरिका की संयुक्त घोषणा में रूसी तेल खरीद पूरी तरह बंद करने का कोई औपचारिक वादा दर्ज नहीं था। बयान में केवल अमेरिका से बड़े पैमाने पर ऊर्जा उत्पाद खरीदने की मंशा जताई गई थी।
🛢 भारत की ऊर्जा रणनीति
Oxford Economics की लीड इकोनॉमिस्ट एलेक्जेंड्रा हरमन के अनुसार, भारत की ऊर्जा रणनीति मूल रूप से कीमत और आपूर्ति विविधीकरण पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी कच्चा तेल पूरी तरह रूसी बैरल की जगह ले पाए, इसकी संभावना कम है।
📌 निष्कर्ष
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में नया संतुलन पैदा किया है।
भारत के लिए रूसी तेल आयात पूरी तरह बंद करना व्यावहारिक नहीं दिखता, जबकि अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
आने वाले महीनों में भारत की ऊर्जा नीति रणनीतिक संतुलन की दिशा में आगे बढ़ती दिख सकती है — जहां कूटनीति, व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा एक साथ साधनी होगी।






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