E20 पेट्रोल पर संसदीय समिति सख्त, सांसदों ने पूछा- माइलेज घटने की जानकारी पहले क्यों नहीं दी?
नई दिल्ली। E20 पेट्रोल को लेकर देशभर में चल रही बहस अब संसदीय समिति तक पहुंच गई है। परिवहन से जुड़ी संसदीय समिति ने सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से सवाल किया कि जिन वाहनों को E20 के लिए डिजाइन नहीं किया गया है, उनके मालिकों को पहले यह स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई कि 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल से माइलेज में कमी आ सकती है।
जेडीयू सांसद संजय झा की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, वाहन परीक्षण एजेंसियों और तेल विपणन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में पुराने वाहनों पर E20 ईंधन के प्रभाव, माइलेज में कमी और इंजन की कार्यक्षमता को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, समिति के कुछ सदस्यों ने यह भी जानना चाहा कि क्या सरकार ने E20 ईंधन के उपयोग से वाहन मालिकों को होने वाले आर्थिक लाभ या नुकसान का कोई विस्तृत अध्ययन किया है। हालांकि सदस्यों ने यह भी माना कि पेट्रोल में एथनॉल की मात्रा बढ़ने से देश की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि E20 पेट्रोल के उपयोग से माइलेज में लगभग 2 से 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ जगहों पर 25 प्रतिशत माइलेज घटने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ऐसे दावों का कोई आधिकारिक आधार नहीं है।
अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि E22, E25 और E30 जैसे अधिक एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की अधिसूचना और मिलावटी ईंधन की बिक्री जैसे मुद्दों ने भी इस विवाद को बढ़ाया है।
सरकार का कहना है कि 19 प्रतिशत से अधिक एथनॉल मिश्रित ईंधन पिछले दो वर्षों से बाजार में उपलब्ध है और अब तक इंजन को नुकसान पहुंचाने के कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आए हैं। फिर भी संसदीय समिति ने इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट और स्पष्ट जानकारी मांगी है।

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