माघ मेले में मां की गोद से बिछड़ गए थे ‘नन्हे’, दूधवाले की टोकरी में मिले लाल बहादुर शास्त्री
प्रयागराज। देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उनकी जिंदगी से जुड़ी बचपन की एक बेहद रोचक कहानी सामने आती है। बताया जाता है कि बचपन में एक बार प्रयागराज के माघ मेले में वे अपनी मां की गोद से बिछड़ गए थे। उस समय उनकी उम्र महज चार महीने थी।
भीड़ में मां की गोद से छूट गए थे ‘नन्हे’
कहानी के अनुसार, माघ मेले में भारी भीड़ के दौरान उनकी मां रामदुलारी देवी को धक्का लगा और उनकी गोद से बच्चा छूट गया। काफी तलाश के बाद भी बच्चा नहीं मिला। परिवार ने आसपास खोजबीन शुरू की और पुलिस को भी सूचना दी।
दूधवाले की टोकरी में मिला बच्चा
मेले के पास नदी किनारे खड़ी एक नाव में मौजूद दूधवाले की टोकरी में अचानक एक बच्चा आ गिरा। दूधवाले ने बच्चे को ठंड से बचाने के लिए अपने कपड़े से ढका और उसे दूध पिलाया। वह बच्चे को अपने पास ही रखने लगा।
करीब एक घंटे बाद पिता ने खोज निकाला
बच्चे के पिता शारदा प्रसाद करीब एक घंटे तक उसकी तलाश करते रहे। आखिरकार उनकी नजर नाव में टोकरी के अंदर बच्चे पर पड़ी। बच्चे को लेकर दूधवाले और परिवार के बीच विवाद भी हुआ। बाद में रामदुलारी देवी ने बच्चे को पहचान लिया और उसे अपनी गोद में ले लिया।
दूधवाले को शॉल और दूध के पैसे दिए
बच्चे की देखभाल के लिए शारदा प्रसाद ने दूधवाले को अपना ऊनी शॉल दिया। दूधवाले ने बच्चे को पिलाए गए दूध के पैसे भी मांगे, जिस पर शारदा प्रसाद ने उसे 5 रुपये दे दिए।
आगे चलकर बने देश के प्रधानमंत्री
यही बच्चा आगे चलकर भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री बने। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1904 को हुआ था। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद उनका पालन-पोषण नाना के घर हुआ।
लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी, ईमानदारी और देशसेवा के लिए याद किया जाता है। उनकी जयंती हर साल 2 अक्टूबर को मनाई जाती है।

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